मेरठ सौरभ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

Sahil-Muskan: Death Sentence
मेरठ : देशभर में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मेरठ की जिला अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। इससे पहले 30 सितंबर को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया था। सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई थी। बुधवार को दोनों की वर्चुअल माध्यम से पेशी हुई, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

अदालत में सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने हत्या के तरीके, शव को छिपाने और साक्ष्य मिटाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की। अदालत ने मामले को गंभीर अपराध मानते हुए दोनों को मृत्युदंड सुनाया। फैसले के बाद सौरभ के परिवार ने संतोष जताया और कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है।

वादी पक्ष ने कहा- हत्या सुनियोजित तरीके से की गई

वादी पक्ष के अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने अदालत में दलील दी कि सौरभ की हत्या किसी अचानक हुए विवाद या उकसावे का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसे सोच-समझकर अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि हत्या के बाद भी आरोपियों ने शव के टुकड़े किए और साक्ष्य छिपाने की कोशिश की। अधिवक्ता के मुताबिक, मृतक का सिर आरोपी साहिल अपने घर तक लेकर गया था।

विजय बहादुर सिंह ने अदालत के सामने सुप्रीम कोर्ट के एक मामले का हवाला देते हुए मृत्युदंड की मांग की। उन्होंने कहा कि अपराध की प्रकृति और उसके बाद किए गए कृत्यों को देखते हुए कड़ी सजा दी जानी चाहिए। वादी पक्ष का तर्क था कि ऐसे मामलों में सजा का उद्देश्य केवल दोषियों को दंडित करना नहीं, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखना भी है।

फैसला सुनाए जाने के दौरान सौरभ की मां रेनू देवी और भाई बबलू भी अदालत में मौजूद रहे। वादी पक्ष के अधिवक्ता ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि यह निर्णय समाज के लिए एक उदाहरण बनेगा।

126 पेशियों और 22 गवाहों के बाद आया फैसला

इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। मुकदमे में कुल 126 पेशियां हुईं। अभियोजन ने गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अपना पक्ष रखा।

30 सितंबर को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या के साथ-साथ साक्ष्य मिटाने और सबूत छिपाने से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया था। इसके बाद अदालत ने सजा पर फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी।

बुधवार को वर्चुअल पेशी के दौरान दोनों आरोपियों को अदालत के सामने पेश किया गया। दोनों पक्षों की दलीलों और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मृत्युदंड सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में अपराध की गंभीरता का उल्लेख किया और महाभारत के प्रसंग का भी जिक्र किया।

कोर्ट ने अपराध की गंभीरता पर की टिप्पणी

अदालत ने मामले को गंभीर और समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला अपराध माना। सुनवाई के दौरान वादी पक्ष ने कहा था कि हत्या के बाद शव के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया और साक्ष्य छिपाने के प्रयास किए गए, वे अपराध की गंभीरता को दर्शाते हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने हत्या के बाद वारदात को छिपाने के लिए कदम उठाए थे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों को दोषी ठहराया। बुधवार को सुनाई गई सजा के बाद मामले ने एक बार फिर व्यापक चर्चा का रूप ले लिया।

हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। दोषियों को कानून के तहत उच्च अदालत में अपील करने का अधिकार है। इसलिए अंतिम कानूनी स्थिति आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

सौरभ की मां बोलीं- हमें न्याय मिल गया

फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी ने राहत और संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों को मौत की सजा सुनाए जाने से उन्हें न्याय मिलने का एहसास हुआ है। उन्होंने मुकदमे के दौरान सहयोग करने वाले वकीलों, सहयोगियों और स्टाफ के प्रति आभार जताया।

सौरभ के परिवार के लिए यह मामला लंबे समय तक न्याय की लड़ाई बना रहा। अदालत के फैसले के बाद परिवार ने संतोष जताया। वादी पक्ष के अधिवक्ता ने भी कहा कि निर्णय से समाज में यह संदेश जाएगा कि गंभीर अपराधों के मामलों में कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई हो सकती है।

मार्च 2025 में हुई थी सौरभ की हत्या

यह मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, मार्च 2025 में मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या की थी। आरोप था कि हत्या के बाद शव के कई टुकड़े किए गए और उन्हें सीमेंट के घोल के साथ एक नीले ड्रम में छिपा दिया गया।

बताया गया कि वारदात के बाद मुस्कान और साहिल घर पर ताला लगाकर करीब दस दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए थे। बाद में मामला सामने आने पर पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों के खिलाफ मुकदमा चला।

घटना की क्रूरता और शव को छिपाने के आरोपों के कारण यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना। लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद जिला अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और अब मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

अदालत के फैसले के बाद सौरभ के परिवार ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं, आगे की अपील और न्यायिक प्रक्रिया से यह तय होगा कि मृत्युदंड के फैसले पर अंतिम कानूनी निर्णय कब और किस रूप में आता है।

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