इस मंजूरी से संस्थान में आयुर्वेद की विभिन्न विधाओं में उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुलेंगे। इसके साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण, शोध-अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। संस्थान में पीजी पाठ्यक्रम शुरू होने से उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा, जो बीएएमएस की पढ़ाई के बाद आयुर्वेद के किसी विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं।
14 पीजी पाठ्यक्रमों को मिली अनुमति
राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला, जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के डीम्ड विश्वविद्यालय के ऑफ-कैंपस के रूप में संचालित है। एनसीआईएसएम की मंजूरी के बाद यहां स्नातकोत्तर स्तर पर आयुर्वेद की विभिन्न विधाओं में पढ़ाई का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
फिलहाल संस्थान में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) की 100 सीटें निर्धारित हैं। संस्थान में शैक्षणिक सत्र 2024-25 में पहला बैच शुरू हुआ था। इसके बाद 2025-26 में दूसरे बैच में विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। अब 2026-27 के लिए तीसरे बैच की काउंसलिंग जारी है, जिसके दो चरण पूरे हो चुके हैं।
पीजी पाठ्यक्रमों की मंजूरी को संस्थान के शैक्षणिक विस्तार की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को स्नातक के बाद उच्च शिक्षा के लिए अधिक अवसर मिलेंगे।
विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण और शोध को मिलेगी गति
संस्थान के डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी ने बताया कि आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा के प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि 14 पीजी पाठ्यक्रमों की मंजूरी से आयुर्वेद शिक्षा, विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण और शोध-अनुसंधान को नई गति मिलेगी।
संस्थान के डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने भी पीजी पाठ्यक्रमों की मान्यता मिलने पर कुलपति का आभार जताया। उन्होंने कहा कि एनआईए पंचकूला उत्तर भारत में आयुर्वेद शिक्षा, चिकित्सा और अनुसंधान के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि नए पाठ्यक्रमों से आयुर्वेद चिकित्सा को प्रोत्साहन मिलेगा और उच्च शिक्षा में विशेषज्ञता हासिल करने के इच्छुक युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
आयुर्वेद की विभिन्न विधाओं में होगी पढ़ाई
संस्थान में स्वीकृत पीजी पाठ्यक्रमों में आयुर्वेद संहिता, सिद्धांत एवं संस्कृत, रचना शारीर, क्रिया शारीर, द्रव्यगुण विज्ञान, रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना, रोग निदान एवं विकृति विज्ञान, अगद तंत्र एवं विधि वैद्यक, स्वस्थवृत्त एवं योग, कौमारभृत्य-बाल रोग, कायचिकित्सा, पंचकर्म, स्त्री रोग एवं प्रसूति तंत्र, शल्य तंत्र और शालाक्य तंत्र जैसे विषय शामिल हैं।
इन विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आयुर्वेद के अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर सकेंगे। इससे चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ अकादमिक गतिविधियों और अनुसंधान के क्षेत्र में भी संभावनाएं बढ़ेंगी।
प्रत्येक पाठ्यक्रम में पांच सीटें निर्धारित
जारी जानकारी के अनुसार, प्रत्येक पीजी पाठ्यक्रम में पांच-पांच सीटें निर्धारित की गई हैं। शालाक्य तंत्र की पांच सीटों में से तीन कर्ण, नासा एवं मुख रोग चिकित्सा और दो नेत्र रोग चिकित्सा के लिए निर्धारित हैं।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कुल 70 पीजी सीटों पर दाखिले का अवसर मिलेगा। इस विस्तार से पंचकूला स्थित संस्थान में आयुर्वेद की उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की नई पीढ़ी तैयार करने, चिकित्सा पद्धति पर शोध को प्रोत्साहित करने और विद्यार्थियों को उन्नत प्रशिक्षण देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

