गृह मंत्रालय की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) ने सोमवार को इस संबंध में एडवाइजरी जारी की। इसमें बताया गया कि ठग लोगों से टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज और वेरिफिकेशन फीस के नाम पर भुगतान करवाते हैं। पीड़ितों को भरोसा दिलाया जाता है कि फीस जमा करने के बाद उनके खाते में सरकारी सहायता की राशि भेज दी जाएगी।
डीपफेक वीडियो से फैलाया जा रहा जाल
एडवाइजरी के मुताबिक, जालसाज मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसे विज्ञापन डाल रहे हैं, जिनमें सार्वजनिक हस्तियों को कथित तौर पर जरूरतमंद लोगों के लिए वित्तीय सहायता योजना की घोषणा करते दिखाया जाता है। इन विज्ञापनों में फोन नंबर या लिंक दिए जाते हैं। उन पर संपर्क करने के बाद लोगों को फोन कॉल, व्हाट्सएप चैट या फर्जी वेबसाइट के जरिए ठगी के जाल में फंसाया जाता है।
कुछ मामलों में पीड़ितों को नकली कैशबैक, स्क्रैच कार्ड और स्पिन-एंड-विन प्रतियोगिताओं का लालच दिया जाता है। ठग दावा करते हैं कि व्यक्ति को किसी योजना या इनाम के लिए चुना गया है। इसके बाद लाभ जारी करने से पहले अलग-अलग शुल्क के नाम पर बार-बार पैसे मांगे जाते हैं।
+92 नंबर से आने वाली कॉल से रहें सावधान
गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय नंबरों से आने वाली कॉल को लेकर भी चेतावनी दी है। विशेष रूप से +92 से शुरू होने वाले नंबरों का उल्लेख किया गया है, जो पाकिस्तान का कंट्री कोड है। ऐसे नंबरों से कॉल करने वाले खुद को किसी सार्वजनिक हस्ती या सरकारी कार्यालय का प्रतिनिधि बताकर आर्थिक सहायता दिलाने का दावा कर सकते हैं।
मंत्रालय ने सलाह दी है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान और सरकारी योजना की जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित संपर्क माध्यम से जांचें। केवल फोन कॉल या सोशल मीडिया विज्ञापन के आधार पर भरोसा न करें।
UPI PIN डालने से खाते से निकल सकते हैं पैसे
एडवाइजरी में UPI के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को लेकर भी आगाह किया गया है। जालसाज इनाम की राशि प्राप्त करने के बहाने लोगों से UPI कलेक्ट रिक्वेस्ट मंजूर करवाते हैं या भुगतान ऐप में PIN दर्ज करने को कहते हैं। इससे पीड़ित के खाते से रकम ठग के खाते में जा सकती है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि UPI PIN पैसे भेजने या भुगतान को मंजूरी देने के लिए होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं। किसी भी रिक्वेस्ट को मंजूर करने से पहले राशि, प्राप्तकर्ता और ट्रांजैक्शन का उद्देश्य ध्यान से जांचना चाहिए।
आधार, PAN और OTP की जानकारी साझा न करें
NCTAU ने लोगों को आधार और PAN की जानकारी, बैंक खाते का विवरण, OTP और UPI PIN अज्ञात व्यक्तियों के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी है। सरकारी अधिकारियों के वीडियो या वॉयस रिकॉर्डिंग में किए गए दावों की भी पुष्टि करनी चाहिए, क्योंकि डीपफेक तकनीक से भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है।
मंत्रालय के अनुसार, किसी भी योजना के बारे में जानकारी संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से लें। यदि कोई पहले पैसे जमा करने के लिए कहता है, तो भुगतान करने से पहले दावे की सत्यता जांचें।
ठगी होने पर 1930 पर करें कॉल
साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। बैंक और संबंधित भुगतान सेवा प्रदाता को भी तुरंत सूचना दें।
गृह मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मुफ्त इनाम और सरकारी सहायता के दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। आधिकारिक पुष्टि, सुरक्षित भुगतान और समय पर शिकायत से साइबर ठगी के जोखिम को कम किया जा सकता है।

