इस बार गंगनहर की बंदी हरिद्वार में आगामी कुंभ मेले की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। पानी का बहाव रुकने से नहर किनारे प्रस्तावित नए घाटों के निर्माण कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। सिंचाई विभाग के मुताबिक, बंदी से पहले आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और संबंधित विभागों को भी इसकी सूचना दी गई है।
दशहरे से दीपावली तक बंद रहती है गंगनहर
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग हर साल दशहरे के आसपास गंगनहर का पानी रोकता है। इस अवधि में नहर की सफाई, तल में जमा सिल्ट निकालने, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और दूसरे जरूरी कार्य किए जाते हैं। लगातार पानी बहने के कारण इन कामों को करना मुश्किल होता है, इसलिए वार्षिक बंदी का इस्तेमाल रखरखाव के लिए किया जाता है।
नहर की सफाई और मरम्मत से जल प्रवाह सुचारु बनाए रखने में मदद मिलती है। विभाग का प्रयास रहता है कि निर्धारित अवधि में सभी जरूरी काम पूरे कर लिए जाएं, ताकि दीपावली के आसपास पानी दोबारा छोड़ा जा सके।
कुंभ मेले के लिए बन रहे नए घाट
हरिद्वार में आगामी कुंभ मेले की तैयारियों के तहत गंगनहर किनारे करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबे नए घाट बनाए जा रहे हैं। इनका निर्माण कुंभ मेले के बजट से कराया जा रहा है।
नहर में पानी रहने के कारण कुछ निर्माण कार्यों में दिक्कत आ रही थी। पानी बंद होने के बाद ऐसे कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। कुंभ मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए घाटों का निर्माण और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करना महत्वपूर्ण है।
नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ में जलापूर्ति पर नजर
गंगनहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में पेयजल और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके बंद होने से नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर समेत उन क्षेत्रों में असर पड़ सकता है, जहां पानी की आपूर्ति नहर पर निर्भर है। दिल्ली-NCR के कुछ हिस्सों में भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
ऐसी स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को पहले से पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होती है। सिंचाई विभाग की ओर से बंदी की सूचना संबंधित विभागों को दी जाती है, ताकि वे वैकल्पिक व्यवस्था और जल प्रबंधन की तैयारी कर सकें।
हर की पैड़ी पर स्नान के लिए पानी बनाए रखने की तैयारी
गंगनहर की बंदी का असर हरिद्वार में गंगा के प्रवाह पर भी पड़ता है। भीमगोड़ा बैराज की ओर से आने वाली धारा प्रभावित होने से हर की पैड़ी पर पानी की मात्रा कम हो सकती है। ऐसे में गंगा स्नान के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराना चुनौती बन जाता है।
इस बार अधिकारियों ने हर की पैड़ी पर स्नान के लिए पानी की व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी की है। श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
दीपावली के आसपास फिर छोड़ा जाएगा पानी
यूपी सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी के अनुसार, दशहरे की रात से गंगनहर का पानी रोककर सफाई, सिल्ट निकालने और रखरखाव के कार्य किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सभी जरूरी काम पूरे होने के बाद दीपावली के आसपास नहर में फिर से पानी छोड़ा जाएगा।
इस वार्षिक बंदी के दौरान विभाग के सामने नहर का रखरखाव पूरा करने, पेयजल आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुचारु रखने और हरिद्वार में कुंभ मेले के लिए घाट निर्माण को गति देने की जिम्मेदारी रहेगी।

