इटावा : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच इटावा से सामने आए एक बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। जसवंतनगर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव की कांग्रेस को लेकर की गई कथित टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई है। शिवपाल के हवाले से कहा गया कि जसवंतनगर में कांग्रेस को एक भी वोट नहीं मिलेगा। उनके इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति में सपा-कांग्रेस के रिश्तों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की बात कर रहे हैं। हाल के दिनों में सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच अलग-अलग बयान सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दोनों दल गठबंधन में चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं, लेकिन सीट शेयरिंग और बातचीत के समय को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
रायबरेली से शुरू हुई सियासत की गूंज इटावा तक
24 सितंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रायबरेली से पार्टी की 2027 चुनावी मुहिम के तहत ‘पीडीए रथ’ अभियान शुरू किया। इस दौरान उन्होंने सपा-कांग्रेस गठबंधन को मजबूत बताते हुए साथ काम करने की बात कही थी।
वहीं, कांग्रेस की ओर से भी गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस जल्द निर्णय चाहती है, जबकि सपा की ओर से सीटों पर उम्मीदवार की जीत की संभावना को महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में जसवंतनगर से शिवपाल सिंह यादव का बयान सामने आया है। इससे स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के बीच तालमेल और सीटों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जसवंतनगर का अपना राजनीतिक महत्व
जसवंतनगर सीट यादव परिवार की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रही है और शिवपाल सिंह यादव यहां से चुनाव लड़ते रहे हैं। ऐसे में इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को लेकर दिया गया बयान स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, किसी स्थानीय नेता के बयान को पूरे गठबंधन की अंतिम स्थिति के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। खास तौर पर इसलिए क्योंकि शिवपाल सिंह यादव ने इससे पहले 2 सितंबर को कहा था कि सपा और कांग्रेस मिलकर 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
अब नजर शीर्ष नेतृत्व की बातचीत पर
सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अभी निर्णायक दौर में नहीं पहुंची है। 25 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच अक्टूबर में बातचीत की संभावना भी सामने आई है।
ऐसे में जसवंतनगर में शिवपाल सिंह यादव की टिप्पणी को स्थानीय स्तर की बयानबाजी और व्यापक गठबंधन वार्ता—दोनों संदर्भों में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में सीट शेयरिंग और दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों से ही स्पष्ट होगा कि स्थानीय स्तर पर सामने आए ऐसे बयानों का गठबंधन की चुनावी रणनीति पर क्या असर पड़ता है।

