सहारनपुर : सहारनपुर के बेहट क्षेत्र में बुधवार को एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। गांव खुर्रमपुर में गोगा म्हाड़ी पर प्रसाद चढ़ाने गए 12 वर्षीय छात्र पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में किशोर को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुत्तों ने उसे बुरी तरह नोच डाला, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, जबकि ग्रामीणों में आवारा और जंगली कुत्तों को लेकर दहशत फैल गई।
मृतक छात्र की पहचान मन्नू पुत्र जुगल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि परिवार मूल रूप से मुरादाबाद का रहने वाला है और पिछले करीब 10 वर्षों से सहारनपुर क्षेत्र के आलमपुर खुर्द में रह रहा है। परिवार यहां पोली हाउस में मजदूरी करता है। बुधवार को मन्नू गोगा म्हाड़ी पर प्रसाद चढ़ाने के लिए गया था। इसी दौरान वहां मौजूद कुत्तों के झुंड ने उसे घेर लिया।
अचानक हुआ हमला, बचने का नहीं मिला मौका
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुत्तों ने किशोर पर अचानक हमला किया। हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मन्नू को संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिला। कुत्तों के झुंड ने उसे जमीन पर गिरा दिया और बुरी तरह नोच डाला।
आसपास मौजूद लोगों को जब घटना की जानकारी हुई तो वे मौके की तरफ दौड़े और कुत्तों को भगाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। किशोर की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना की सूचना परिवार को मिली तो घर में चीख-पुकार मच गई।
डेढ़ महीने में बच्चों पर हमले की तीसरी गंभीर घटना
इस घटना के बाद क्षेत्र में आवारा और जंगली कुत्तों के आतंक को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों, रास्तों और आबादी के आसपास कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं। कई बार ये कुत्ते बच्चों और राहगीरों की तरफ दौड़ पड़ते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार पिछले करीब डेढ़ महीने में बच्चों को कुत्तों द्वारा निशाना बनाए जाने की यह तीसरी गंभीर घटना है। लगातार हो रहे हमलों से लोगों में डर बढ़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि अब वे बच्चों को अकेले घर से बाहर भेजने में भी डरने लगे हैं।
धार्मिक स्थल पर भी सुरक्षा को लेकर चिंता
गोगा म्हाड़ी पर हुई इस घटना ने धार्मिक स्थलों और उनके आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि धार्मिक स्थलों, स्कूलों और आबादी वाले रास्तों के आसपास आवारा कुत्तों के झुंड दिखाई देते हैं। ऐसे स्थानों पर बच्चों और बुजुर्गों की आवाजाही अधिक होती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में घूम रहे आक्रामक कुत्तों को पकड़ने के लिए तत्काल अभियान चलाया जाए। साथ ही आबादी वाले इलाकों, स्कूलों और धार्मिक स्थलों के आसपास निगरानी बढ़ाई जाए।
मन्नू की मौत के बाद ग्रामीणों में सिर्फ गुस्सा और दुख ही नहीं, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर पहले सामने आई घटनाओं के बाद प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो शायद आज एक परिवार को अपना 12 साल का बेटा नहीं खोना पड़ता। ग्रामीण अब प्रशासन से कुत्तों के आतंक पर स्थायी नियंत्रण की मांग कर रहे हैं।

