आकाश आनंद का भाजपा पर बड़ा हमला, बोले- 10 साल में विज्ञापन पर खर्च किए 7 हजार करोड़, 25 हजार स्कूल बंद

Akash Anand on Akhilesh Yadav

सहारनपुर : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। सोमवार को सहारनपुर के सौराणा में आयोजित जनसभा में बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, महंगाई, किसानों और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। आकाश आनंद ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने पिछले दस वर्षों में विज्ञापनों पर सात हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए, जबकि इसी अवधि में प्रदेश के 25 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हो गए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के पास अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने के लिए हजारों करोड़ रुपये हैं, लेकिन गरीबों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए पर्याप्त संसाधन क्यों नहीं हैं?

भाजपा के विकास मॉडल पर उठाए सवाल

जनसभा को संबोधित करते हुए आकाश आनंद ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार विकसित और सुरक्षित उत्तर प्रदेश का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के टैक्स का पैसा विज्ञापनों और प्रचार पर खर्च कर रही है।

आकाश आनंद ने झांसी के अस्पताल में बच्चों की मौत का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास विज्ञापनों के लिए हजारों करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, तो अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने, डॉक्टरों की नियुक्ति करने और मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए बजट की कमी क्यों दिखाई देती है? उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता विज्ञापनों में अपनी उपलब्धियां गिनाना नहीं, बल्कि जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। उनके मुताबिक, विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब आम आदमी को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मानजनक जीवन की सुविधा मिले।

25 हजार सरकारी स्कूल बंद होने का लगाया आरोप

शिक्षा व्यवस्था को लेकर आकाश आनंद ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में उत्तर प्रदेश में 25 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए, जबकि डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती अब तक पूरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में गरीब, मजदूर, किसान और बहुजन समाज के बच्चों को शिक्षा मिलती है। ऐसे में सरकारी स्कूलों का बंद होना सबसे अधिक उन परिवारों को प्रभावित करता है, जिनके पास अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में पढ़ाने की आर्थिक क्षमता नहीं है।

आकाश आनंद ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की कमी का बहाना बनाकर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है। यदि गरीब परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलेगी, तो उनके लिए भविष्य में रोजगार और आर्थिक तरक्की के अवसर भी सीमित हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को सरकारी स्कूलों की संख्या कम करने के बजाय उनमें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के लिए बेहतर वातावरण सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

भर्ती में देरी और पेपर लीक से परेशान युवा

रोजगार के मुद्दे पर भी आकाश आनंद ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है, लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के कारण उसकी मेहनत प्रभावित होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार बड़े आयोजन और विज्ञापनों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर सकती है, लेकिन युवाओं को निष्पक्ष परीक्षा और समय पर रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्यों नहीं कर पा रही है?

आकाश आनंद ने कहा कि युवाओं को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि रोजगार चाहिए। भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना, परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि इससे युवाओं के भविष्य और परिवारों की सामाजिक स्थिति पर भी असर पड़ता है।

मुफ्त राशन नहीं, रोजगार से आत्मनिर्भरता जरूरी

मुफ्त राशन योजना पर कटाक्ष करते हुए आकाश आनंद ने कहा कि गरीबों को राशन उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी केवल लोगों का पेट भरने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकारी चपरासी की नौकरी का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें भी करीब 30 हजार रुपये मासिक वेतन मिल सकता है। इस हिसाब से सालाना लगभग 3.60 लाख रुपये की आय होती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि युवाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उन्हें सालभर के राशन के सहारे रखना क्या विकास की पहचान है? आकाश आनंद के मुताबिक, राशन तत्काल जरूरत पूरी करता है, लेकिन रोजगार किसी परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के साथ उसे सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें युवाओं को नौकरी मिले और गरीब परिवार अपने पैरों पर खड़े हो सकें।

AI के दौर में बहुजन युवाओं को तकनीकी शिक्षा की जरूरत

भविष्य की तकनीकी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए आकाश आनंद ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में AI रोजगार के स्वरूप को बदलने वाला है। ऐसे में सरकार को विशेष रूप से एससी, एसटी और ओबीसी समाज के युवाओं को तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि गरीब और वंचित समाज के बच्चों को AI की पढ़ाई के लिए क्या सुविधाएं दी जा रही हैं?

AI के कारण प्रभावित होने वाली नौकरियों के विकल्प के रूप में नए रोजगार कैसे पैदा किए जाएंगे? इसके अलावा साइबर हमलों से सरकारी डाटा और नागरिकों की निजी जानकारी सुरक्षित रखने के लिए सरकार की क्या तैयारी है? आकाश आनंद ने कहा कि केवल AI के नाम पर बड़े आयोजन करने से देश तकनीकी रूप से मजबूत नहीं होगा। इसके लिए युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने होंगे।

एक्सप्रेसवे को लेकर भाजपा सरकार पर तंज

प्रदेश में एक्सप्रेसवे निर्माण और विकास के दावों पर भी आकाश आनंद ने भाजपा को घेरा। उन्होंने नोएडा-आगरा एक्सप्रेसवे का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुजन समाज पार्टी की सरकार के समय बने इस एक्सप्रेसवे को 16 साल बाद भी उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने दूसरे एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई परियोजनाओं में निर्माण के कुछ समय बाद ही गड्ढे और अन्य समस्याओं की शिकायतें सामने आईं। इसी क्रम में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नकल के लिए भी अकल की जरूरत होती है। भाजपा की डबल इंजन सरकार पर कटाक्ष करते हुए आकाश आनंद बोले कि यह सरकार तेल ज्यादा पीती है।

महंगाई और गन्ना किसानों के भुगतान का मुद्दा उठाया

आकाश आनंद ने महंगाई को लेकर भी भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने पुराने चुनावी नारों का जिक्र करते हुए कहा कि महंगाई कम करने के वादे किए गए थे, लेकिन आम परिवारों को आज भी घरेलू बजट संभालने में मुश्किल हो रही है। उन्होंने कहा कि रसोई का खर्च, रोजमर्रा की जरूरतें और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आम आदमी की आर्थिक स्थिति पर दबाव डाल रही हैं।

गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार एथेनॉल उत्पादन और उपलब्धियों का प्रचार करती है, लेकिन किसानों को उनकी फसल का पैसा समय पर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत किए बिना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं बनाया जा सकता।

अखिलेश यादव को बताया भाजपा की बी-टीम

जनसभा में आकाश आनंद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने अखिलेश यादव को भाजपा की बी-टीम बताते हुए उनकी राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए। आकाश आनंद ने कहा कि सपा की राजनीति की दिशा स्पष्ट नहीं है। कभी पीडीए की बात होती है, तो कभी अलग-अलग वर्गों को लेकर बयान दिए जाते हैं। उन्होंने चौधरी चरण सिंह के परिवार को लेकर अखिलेश यादव की कथित टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई और कहा कि देश के बड़े किसान नेता तथा उनके परिवार के प्रति सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए।

उन्होंने सपा सरकार के दौरान हुए मुजफ्फरनगर दंगों का उल्लेख करते हुए तत्कालीन कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, प्रदेश की जनता को ऐसी राजनीति से सावधान रहने की जरूरत है, जो सामाजिक सम्मान और सुरक्षा के मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं देती।

कांग्रेस को बताया भाजपा का दूसरा रूप

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आकाश आनंद ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने कांग्रेस पर बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर को उनके जीवनकाल में उचित सम्मान नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने संविधान की किताब दिखाकर बहुजन समाज से वोट मांगे, लेकिन चुनाव के बाद समाज के हित में किए गए ठोस कामों का हिसाब नहीं दिया।

आकाश आनंद ने सवाल उठाया कि पिछले दो वर्षों में इन दलों ने बहुजन समाज के लिए कौन से मुद्दे संसद में उठाए और उनके समाधान के लिए क्या प्रयास किए? उन्होंने कहा कि अब जनता को इन राजनीतिक दलों से उनके काम का हिसाब मांगना चाहिए।

मायावती सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

अपने संबोधन में आकाश आनंद ने बसपा सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने दावा किया कि मायावती के शासन में शिक्षा के क्षेत्र में छह इंजीनियरिंग कॉलेज, 24 पॉलिटेक्निक कॉलेज, दो पैरामेडिकल कॉलेज और 200 से अधिक इंटर तथा डिग्री कॉलेज स्थापित किए गए। उन्होंने कहा कि गांवों में 5,500 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल बनवाए गए। इसके अलावा 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण, भूमिहीन परिवारों को जमीन देने और 30 लाख से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का भी दावा किया।

आकाश आनंद ने कहा कि बसपा सरकार ने सर्वसमाज के हितों को ध्यान में रखकर काम किया था। उन्होंने मायावती के चार बार मुख्यमंत्री रहने के दौरान सामाजिक परिवर्तन और बहुजन समाज के सम्मान के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत महात्मा ज्योतिबा फुले, छत्रपति शाहूजी महाराज, नारायण गुरु, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम को नमन करके की। उन्होंने कहा कि मायावती ने कांशीराम के विचारों को आगे बढ़ाते हुए बाबा साहब के सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन को राजनीतिक ताकत दी। उन्होंने बताया कि वह स्वयं भी इसी आंदोलन से प्रभावित होकर बसपा से जुड़े हैं।

नकुड़ सीट पर प्रत्याशी घोषित, 2027 में मायावती को पांचवीं बार CM बनाने की अपील

जनसभा के दौरान आकाश आनंद ने नकुड़ विधानसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी की घोषणा करते हुए कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों में जुटने की अपील की। उन्होंने गुर्जर, जाट और अन्य समाजों के लोगों से बसपा से जुड़ने का आह्वान किया। आकाश आनंद ने कहा कि सामाजिक सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए संगठन को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर पार्टी की नीतियां जनता तक पहुंचाने और बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का अवसर होगा। बसपा कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरना चाहिए और हाथी चुनाव चिह्न पर मतदान कर मायावती को पांचवीं बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के लिए काम करना चाहिए। सौराणा की इस जनसभा के जरिए आकाश आनंद ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान, राजनीतिक भागीदारी और गरीबों के अधिकारों को प्रमुख मुद्दा बनाएगी। भाजपा, सपा और कांग्रेस पर एक साथ निशाना साधते हुए उन्होंने बसपा को प्रदेश में एक अलग राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया।

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