बनखंडी नाथ मंदिर के संरक्षक हैं गिरधारी लाल साहू, वायरल वीडियो के बाद उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा तेज; बरेली पुलिस बोली- अभी संपर्क नहीं किया गया
बरेली : उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला बरेली तक चर्चा का विषय बन गया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। वहीं, उत्तराखंड पुलिस की संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, बरेली पुलिस का कहना है कि अभी तक उत्तराखंड पुलिस ने इस मामले में स्थानीय पुलिस से संपर्क नहीं किया है।
गिरधारी लाल साहू बरेली में साहू समाज के प्रमुख लोगों में गिने जाते हैं। वह बनखंडी नाथ मंदिर के संरक्षक भी हैं और मंदिर परिसर स्थित कार्यालय से निर्माण कार्यों तथा अन्य गतिविधियों की देखरेख करते रहे हैं। उनके परिचितों के मुताबिक, वह गुरुवार शाम मंदिर परिसर में मौजूद थे और मंदिर से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हुए थे। इसके बाद से उन्हें मंदिर परिसर और उनके घर के आसपास नहीं देखा गया।
वायरल वीडियो के बाद दर्ज हुई एफआईआर
उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने एक वायरल वीडियो के माध्यम से अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए गिरधारी लाल साहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके बाद देहरादून के कैंट थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब इस बात पर नजर है कि उत्तराखंड पुलिस जांच को किस दिशा में आगे बढ़ाती है और क्या मामले में बरेली में भी कोई कार्रवाई की जाती है। हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से किसी संभावित कार्रवाई को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मामले में लगाए गए आरोपों की जांच होना बाकी है। गिरधारी लाल साहू का पक्ष भी सामने नहीं आया है, इसलिए आरोपों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
बनखंडी नाथ मंदिर से जुड़ी है पहचान
बरेली में गिरधारी लाल साहू की पहचान सामाजिक गतिविधियों के साथ-साथ बनखंडी नाथ मंदिर के संरक्षक के रूप में भी रही है। वह मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख करते रहे हैं। उनके परिचितों के मुताबिक, वह मंदिर से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रहते थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बनखंडी नाथ मंदिर में शिवलिंग के स्वयं प्रकट होने की मान्यता है। श्रद्धालुओं की आस्था के चलते यहां करीब 1880 के आसपास निर्माण कराया गया था। वर्तमान में मंदिर को नया स्वरूप देने के लिए निर्माण कार्यों में बदलाव किए जा रहे हैं। इस दौरान पूजा-अर्चना कर भगवान शिव से अनुमति लेने की परंपरा का भी पालन किया गया।
मौजूदा घटनाक्रम के बाद कुछ लोग इस मामले को धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर भी चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है और इन्हें घटना से जुड़े प्रमाण के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बरेली पुलिस ने क्या कहा?
बारादरी थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने बताया कि अभी तक उत्तराखंड पुलिस ने इस मामले में बरेली पुलिस से संपर्क नहीं किया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मामले की चर्चा में आई महिला एक अन्य प्रकरण में जेल में है।
फिलहाल, गिरधारी लाल साहू के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उत्तराखंड पुलिस की जांच, आरोपों से जुड़े साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटनाक्रम पर बरेली के सामाजिक और राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है। अब सबकी निगाहें उत्तराखंड पुलिस की अगली कार्रवाई और गिरधारी लाल साहू के पक्ष पर टिकी हैं।

