हिसार : हरियाणा कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के बाद से जारी अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक हो गई है। हिसार के बरवाला में कांग्रेस नेताओं के बीच सांसद जयप्रकाश (जेपी) को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व जिला परिषद चेयरमैन डॉ. राजेंद्र सूरा ने जहां जयप्रकाश का बचाव करते हुए पार्टी के कुछ नेताओं पर निशाना साधा, वहीं बरवाला के पूर्व विधायक रामनिवास घोड़ेला ने जयप्रकाश पर लगाए जा रहे आरोपों को सही बताते हुए उन्हें जवाब देने की सलाह दी है।
विवाद की शुरुआत कांग्रेस के भीतर चल रही ‘असली और नकली कांग्रेसी’ की बहस से हुई है। इसी मुद्दे पर नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आने के बाद पार्टी की अंदरूनी राजनीति फिर चर्चा में आ गई है।
सूरा ने किया जयप्रकाश का बचाव
पूर्व जिला परिषद चेयरमैन डॉ. राजेंद्र सूरा ने कहा कि किसी नेता के असली या नकली कांग्रेसी होने का फैसला राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि जनता करती है। उन्होंने जयप्रकाश की वरिष्ठता का जिक्र करते हुए कहा कि वह चार बार सांसद रह चुके हैं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं।
सूरा ने कांग्रेस नेता कुलदीप शर्मा और रामकिशन फौजी की ओर से जयप्रकाश को लेकर दिए गए बयानों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जो नेता चुनाव में जनता का समर्थन हासिल नहीं कर पाए, उन्हें दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी राजनीतिक कमियों पर विचार करना चाहिए।
घोड़ेला ने कहा- आरोपों का जवाब दें जेपी
वहीं, बरवाला के पूर्व विधायक रामनिवास घोड़ेला ने कुलदीप शर्मा और रामकिशन फौजी की टिप्पणियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश के बारे में दोनों नेताओं ने जो बातें कही हैं, उनका सांसद को जवाब देना चाहिए।
घोड़ेला ने जयप्रकाश के राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह अलग-अलग राजनीतिक दलों में रहे हैं। उन्होंने लोकदल और हविपा में रहने के साथ निर्दलीय चुनाव लड़ने और बाद में कांग्रेस में शामिल होने का उल्लेख किया। घोड़ेला ने इसी राजनीतिक इतिहास को आधार बनाकर जयप्रकाश की राजनीतिक यात्रा पर सवाल उठाए।
सूरा ने घोड़ेला पर भी साधा निशाना
जयप्रकाश के समर्थन में उतरे राजेंद्र सूरा ने रामनिवास घोड़ेला को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद घोड़ेला ने बगावत कर बरवाला से चुनाव लड़ा था।
सूरा का कहना है कि ऐसे नेताओं को पार्टी के भीतर दूसरों की निष्ठा पर सवाल उठाने से पहले अपने राजनीतिक फैसलों पर विचार करना चाहिए। इस पलटवार के बाद बरवाला की कांग्रेस राजनीति में दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है।
पोस्टर विवाद ने भी बढ़ाई हलचल
घोड़ेला ने कांग्रेस के भीतर चल रहे पोस्टर विवाद को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के पोस्टर नहीं लगाए जाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक संगठन में एक स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए और पार्टी के सभी नेताओं के पद एवं राजनीतिक योगदान का सम्मान किया जाना चाहिए।
घोड़ेला ने कहा कि आज किसान, मजदूर और आम आदमी कई समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे समय में कांग्रेस नेताओं को सरकार के खिलाफ जनता के मुद्दे उठाने चाहिए, लेकिन पार्टी के नेता आपस में ही उलझे हुए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के सत्ता में नहीं आने के पीछे पार्टी की अंदरूनी राजनीति एक कारण रही है। हालांकि यह उनका राजनीतिक दावा है।
संगठन के सामने चुनौती
हिसार में सामने आया विवाद केवल दो नेताओं के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं दिख रहा। जयप्रकाश का राजनीतिक कद, टिकट वितरण, पोस्टर विवाद, संगठनात्मक व्यवस्था और ‘असली-नकली कांग्रेसी’ जैसे मुद्दों ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
एक तरफ जयप्रकाश समर्थक नेता उनके वरिष्ठ राजनीतिक अनुभव का बचाव कर रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोधी खेमे के नेता उनके पुराने राजनीतिक फैसलों और भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
अब कांग्रेस संगठन के सामने चुनौती इन मतभेदों को सार्वजनिक बयानबाजी से निकालकर पार्टी मंच पर सुलझाने की है। बरवाला में शुरू हुई यह जुबानी जंग आगे किस रूप में सामने आती है, इस पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

