मुजफ्फरनगर : भोपा थाना क्षेत्र के गांव धीराहेड़ी में 26 साल पहले हुई हत्या के मामले में अदालत ने सात आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-1 की पीठासीन अधिकारी ज्योत्सना सिंह ने शनिवार को फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों पर 1.87-1.87 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
शासकीय अधिवक्ता राजीव शर्मा के मुताबिक, मामले की शुरुआत 20 सितंबर 2000 को हुई थी। वादी जसवीर सिंह ने भोपा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत के अनुसार, उनका भतीजा जयविंद्र अपने साथियों रूपक और गौतम के साथ जनता इंटर कॉलेज भोपा से घर लौट रहा था। गांव में धूम सिंह के मकान के सामने पहुंचने पर दूसरे पक्ष के लोगों ने रूपक और गौतम को पकड़ लिया और उन्हें घर के अंदर बंद कर दिया।
जयविंद्र किसी तरह मौके से निकलकर अपने परिजनों को घटना की जानकारी देने पहुंचा। इसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे। आरोप था कि इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से फायरिंग शुरू कर दी गई। गोलीबारी में रविंद्र कुमार की मौत हो गई, जबकि सात अन्य लोग घायल हो गए थे।
कई लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
घटना के बाद पुलिस ने धूम सिंह, उसके बेटों गुलवीर और ओमवीर समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान मुख्य आरोपी धूम सिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए अदालत में कुल 11 गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।
दो आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
ट्रायल के दौरान धूम सिंह के दोनों बेटों ओमवीर और गुलवीर को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। वहीं, सात अन्य आरोपियों अनिल, रविन्द्र, नवाब, संजीव, पंकज, प्रीतम और बसंत को अदालत ने दोषी माना।
अदालत ने सभी सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1 लाख 87 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। करीब ढाई दशक से अधिक समय से चल रहे इस मामले में अदालत के फैसले के बाद अब सात दोषियों को हत्या के मामले में सजा मिली है।

