देवबंदी उलेमाओं की नसीहत: पर्दा सिर्फ बाहर नहीं, सोशल मीडिया पर भी हया और एहतियात जरूरी

Waqf Property Act

सहारनपुर : सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के बीच देवबंदी उलेमाओं ने महिलाओं और युवतियों को पर्दे और ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर एहतियात बरतने की नसीहत दी है। देवबंदी उलेमा कारी इसहाक गोरा ने कहा कि पर्दा केवल घर से बाहर निकलते समय चेहरे को ढकने तक सीमित नहीं है, बल्कि हया, सादगी, शराफत और निजी जिंदगी को गैर-महरम की निगाहों से महफूज रखने से भी जुड़ा है।

कारी इसहाक गोरा ने कहा कि समाज में पर्दे को लेकर जागरूकता देखने को मिल रही है। बड़ी संख्या में महिलाएं बाहर निकलते समय नकाब और पर्दे का एहतिमाम करती हैं। लेकिन दूसरी ओर सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करने का चलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में लोगों को अपने ऑनलाइन व्यवहार पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

तस्वीर और वीडियो साझा करने से पहले सोचें

उलेमा ने कहा कि कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर पर्दे का पालन करती हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें, वीडियो और निजी जिंदगी से जुड़े पल साझा करती हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को खुद से यह सवाल करना चाहिए कि जिस चेहरे और निजी जीवन को गैर-महरम की निगाहों से बचाने की कोशिश की जा रही है, उसकी तस्वीर को सोशल मीडिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचाना पर्दे की मूल भावना के कितना अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आज रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। शादी समारोह, यात्रा, पारिवारिक कार्यक्रम या खुशी के किसी मौके पर लोग तस्वीरें और वीडियो बनाकर तुरंत सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। हालांकि, हर उस पल को सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है, जिसे कैमरे में कैद किया जा सकता है।

‘दूसरों की कमियां देखने से पहले खुद का जायजा लें’

कारी इसहाक गोरा ने महिलाओं से सोशल मीडिया पर तस्वीर या वीडियो साझा करने से पहले उसकी जरूरत और संभावित प्रभाव पर विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्दे की भावना केवल कपड़े या नकाब तक सीमित नहीं होनी चाहिए। व्यक्ति के व्यवहार, बातचीत और ऑनलाइन गतिविधियों में भी हया और एहतियात दिखाई देनी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी महिला को निशाना बनाना या किसी व्यक्ति पर उंगली उठाना नहीं है। उनका संदेश आत्ममंथन के लिए है। उन्होंने कहा कि दूसरों की कमियां तलाशने से पहले हर व्यक्ति को अपने अमल का जायजा लेना चाहिए।

कारी इसहाक गोरा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति हया और पर्दे को अपने जीवन में अहम मानता है तो उसके सोशल मीडिया अकाउंट और ऑनलाइन व्यवहार में भी इसकी झलक दिखनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर निजी जिंदगी साझा करने से पहले यह जरूर सोचें कि उसे सार्वजनिक करना वास्तव में जरूरी है या नहीं।

उन्होंने कहा कि पर्दे की भावना सिर्फ घर के दरवाजे से बाहर निकलने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि कैमरे और सोशल मीडिया की दुनिया में भी हया और एहतियात का ध्यान रखा जाना चाहिए।

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