देहरादून : उत्तराखंड की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की सक्रिय वापसी के बाद पार्टी के भीतर नई सियासी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। स्वास्थ्य लाभ के बाद प्रदेश लौटे रावत लगातार अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों और जिलों का दौरा कर रहे हैं। रोड शो से लेकर स्थानीय कार्यक्रमों तक उनकी बढ़ती मौजूदगी ने कांग्रेस के अंदर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हरदा संगठन की तय गतिविधियों से अलग अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं?

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी अपने स्तर पर कार्यक्रम और अभियान चला रही है, जबकि दूसरी ओर हरीश रावत के व्यक्तिगत कार्यक्रम भी लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में संगठन और रावत की गतिविधियों के बीच तालमेल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
वापसी के बाद लगातार सक्रिय हरदा
करीब दो महीने से ज्यादा समय तक उत्तराखंड से बाहर रहने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते उपचार व स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद हरीश रावत प्रदेश लौटे हैं। वापसी के बाद उन्होंने जिस तरह राजनीतिक गतिविधियां तेज की हैं, उससे साफ है कि वह उत्तराखंड की राजनीति से दूरी बनाने के मूड में नहीं हैं।
रावत पहले ही कह चुके हैं कि वह आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके बावजूद चुनावी राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर सवाल बने हुए हैं। मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से लेकर चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका तक, कांग्रेस के भीतर रावत को लेकर चर्चा लगातार जारी है।
गणेश गोदियाल बोले- पार्टी फोरम में होगा फैसला
हरीश रावत के कार्यक्रमों को लेकर जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल से सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे टकराव की स्थिति से बचते हुए पार्टी फोरम में चर्चा की बात कही। गोदियाल ने कहा कि हरीश रावत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण मुद्दों पर आपसी बातचीत और मंथन के बाद सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि उनकी रावत से हाल ही में मुलाकात भी हुई है और प्रदेश की राजनीति समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई। इससे संकेत मिलते हैं कि प्रदेश नेतृत्व फिलहाल रावत की सक्रियता को लेकर सार्वजनिक विवाद खड़ा करने के बजाय संवाद के रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है।
प्रदेश प्रभारी ने भी लिखी चिट्ठी
हालांकि, हरीश रावत की प्रस्तावित यात्रा और कार्यक्रमों को लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा की ओर से उन्हें पत्र लिखा गया है। पत्र में कहा गया कि राज्य में प्रस्तावित यात्रा के संबंध में प्रदेश प्रभारी और पीसीसी अध्यक्ष से चर्चा नहीं हुई है।
सैलजा ने चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता की जरूरत पर जोर देते हुए रावत से ऐसे कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया, जिन्हें पार्टी के समानांतर कार्यक्रम के तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव नजदीक होने के कारण कांग्रेस को एकजुट होकर जनता के सामने जाना होगा।
यही पत्र अब कांग्रेस के भीतर चल रही चर्चाओं को और महत्वपूर्ण बना रहा है। एक तरफ रावत लगातार मैदान में दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ संगठन उन्हें पार्टी की निर्धारित रणनीति के साथ समन्वय में आगे बढ़ाने की कोशिश करता नजर आ रहा है।
कांग्रेस के लिए चुनौती क्या?
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे चर्चित और अनुभवी नेताओं में रहे हैं। ऐसे में उनकी सक्रियता को पूरी तरह नजरअंदाज करना संगठन के लिए आसान नहीं है। दूसरी ओर पार्टी चुनावी अभियान को एक स्पष्ट संगठनात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है।
अब असली सवाल यही है कि आने वाले महीनों में रावत और प्रदेश संगठन के बीच तालमेल किस रूप में दिखाई देता है। यदि उनके कार्यक्रम पार्टी के अभियान के साथ समन्वय में चलते हैं तो यह संगठनात्मक ताकत के रूप में सामने आ सकता है। वहीं, यदि दोनों की राजनीतिक गतिविधियां अलग-अलग दिशा में बढ़ती हैं तो कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर चर्चा और तेज हो सकती है।
2027 के चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस के लिए हरीश रावत की सक्रियता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी वापसी ने संगठन के भीतर नेतृत्व, चुनावी रणनीति और राजनीतिक भूमिका को लेकर पुराने सवालों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

