CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी मामले में संजय राउत और निखिल वागले को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

SP MLA Nahid Hasan

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणियों के मामले में शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अदालत ने दोनों से पूछा है कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने दोनों को नोटिस जारी करते हुए व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो लोग व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत आते हैं, वे ही अब इसकी आलोचना कर रहे हैं।

‘अधिकारों की रक्षा में पीछे नहीं रही अदालत’

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जब भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता या मौलिक अधिकारों पर खतरा होता है, लोग संरक्षण के लिए अदालत का रुख करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में अधिकारों की रक्षा करने से कभी पीछे हटने का काम नहीं किया। इसके बावजूद संस्था की आलोचना होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित लोगों को सद्बुद्धि आएगी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने कहा कि अवमानना की कार्यवाही शुरू करना दुखद है, क्योंकि संबंधित लोगों में एक जिम्मेदार सांसद और दूसरे वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने मामले में व्यक्तिगत उपस्थिति की जरूरत पर भी जोर दिया। हालांकि, पीठ ने दोनों को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी।

अटॉर्नी जनरल ने 15 अक्टूबर को दी थी सहमति

भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने 15 अक्टूबर को संजय राउत और निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दी थी। यह सहमति SCBA की ओर से दायर याचिका के बाद दी गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने SCBA का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अदालत पर दबाव बनाने के उद्देश्य से ऐसी टिप्पणियां करते हैं। उनके मुताबिक, ऐसी कोशिशों का उद्देश्य न्यायपालिका पर दबाव डालना हो सकता है।

सोशल मीडिया पोस्ट और ट्वीट पर विवाद

याचिका के मुताबिक, पत्रकार निखिल वागले ने सीजेआई के एक फैसले से जुड़ी अखबार की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट की थी। बाद में उन्होंने पोस्ट हटा दी और माफी मांगी।

अटॉर्नी जनरल ने अपने सहमति पत्र में वागले और राउत के बयानों को प्रथम दृष्टया गंभीर बताते हुए कहा था कि इनसे सुप्रीम कोर्ट और विशेष रूप से मुख्य न्यायाधीश की प्रतिष्ठा कम करने का प्रयास प्रतीत होता है।

पत्र में संजय राउत के उन ट्वीट का भी उल्लेख किया गया, जिनमें भाजपा शासित राज्यों में न्यायाधीशों के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने और मुख्यमंत्रियों की ओर से न्यायाधीशों के स्वागत में रात्रिभोज आयोजित करने संबंधी दावे किए गए थे। अटॉर्नी जनरल के अनुसार, इन दावों के समर्थन में पर्याप्त तथ्य नहीं थे। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के 19 जून 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि न्यायाधीशों के लंदन में बैडमिंटन खेलने और भाजपा से जुड़े लोगों के साथ होने संबंधी दावे गलत पाए गए थे।

अब जवाब के आधार पर आगे बढ़ेगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद संजय राउत और निखिल वागले को अपना पक्ष रखना होगा। फिलहाल अदालत ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आगे की कार्रवाई उनके जवाब और अदालत के विचार के आधार पर तय होगी। यह मामला न्यायपालिका की प्रतिष्ठा, सार्वजनिक आलोचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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