लखनऊ : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारत निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक इन सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा और इसी दिन मतगणना भी कराई जाएगी। चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी हो चुकी है। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर निर्धारित है।
चुनाव कार्यक्रम सामने आने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी में उम्मीदवारों के चयन को लेकर मंथन तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश की जिन 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, उनमें वर्तमान में आठ बीजेपी, एक सपा और एक बसपा के पास है। इन सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
सपा ने दो नाम किए तय
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने दो उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं। पार्टी की विधायक बैठक में वर्तमान राज्यसभा सदस्य प्रोफेसर रामगोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम पर सहमति बनी है। दोनों उम्मीदवारों के नाम पार्टी की ओर से विधायकों के सामने रखे गए।
रामगोपाल यादव सपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और मौजूदा समय में राज्यसभा सदस्य हैं। वहीं आलोक रंजन उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं और सपा के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी आलोक रंजन सपा के उम्मीदवार थे, हालांकि वह चुनाव नहीं जीत सके थे।
तीसरे उम्मीदवार के नाम पर मंथन
सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारने की चर्चा भी जारी है। इस सीट के लिए सलीम इकबाल शेरवानी, चौधरी रुद्रसेन और अरविंद सिंह गोप समेत कई नाम चर्चा में हैं। सलीम शेरवानी ने खुद भी राज्यसभा जाने की इच्छा सार्वजनिक रूप से जाहिर की है। हालांकि, तीसरे उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व तीसरे उम्मीदवार के लिए समर्थन जुटाने की क्षमता को भी देख रहा है। सपा के पास दो उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। इसी वजह से तीसरी सीट को लेकर चुनावी गणित महत्वपूर्ण हो गया है।
क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच बढ़ी हलचल
तीसरे उम्मीदवार के समर्थन को लेकर संभावित क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। सपा के कुछ नेताओं की ओर से बीजेपी के असंतुष्ट विधायकों के समर्थन का दावा किया गया है। हालांकि, ऐसे दावों की बीजेपी के किसी विधायक की ओर से सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।
सपा के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखने के साथ-साथ तीसरे उम्मीदवार के लिए जरूरी अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती है। पार्टी की बैठकों में इसी चुनावी रणनीति पर चर्चा की जा रही है।
बीजेपी की रणनीति पर भी नजर
दूसरी ओर बीजेपी में भी राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर मंथन चल रहा है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर दोनों प्रमुख दलों के लिए सीटों का गणित पहले से काफी हद तक स्पष्ट माना जा रहा है, लेकिन अतिरिक्त उम्मीदवारों के मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के विधायक मतदान करेंगे। ऐसे में प्रत्याशियों की संख्या, दलों के पास उपलब्ध विधायकों की संख्या और संभावित क्रॉस वोटिंग चुनाव के परिणाम पर असर डाल सकती है।
फिलहाल सपा ने रामगोपाल यादव और आलोक रंजन के नाम तय कर दिए हैं, जबकि तीसरे उम्मीदवार को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुकाबले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। इसके बाद 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना के साथ यूपी की 10 राज्यसभा सीटों का अंतिम परिणाम स्पष्ट होगा।

