90.59 लाख की साइबर ठगी में जब्त स्कोडा कार छुड़ाने की कोशिश, श्रद्धा दुबे को कोर्ट का नोटिस

Attempt to recover a Skoda car seized in a ₹90.59 lakh cyber fraud case: Court issues notice to Shraddha Dubey
सहारनपुर : आयुष्मान भारत योजना से जुड़े 90.59 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में जब्त लग्जरी स्कोडा कार को छुड़ाने की कानूनी लड़ाई अब अदालत पहुंच गई है। पीड़ित डॉ. प्रभात कुमार वर्मा की ओर से वाहन रिलीज कराने के लिए दाखिल प्रार्थना पत्र पर सहारनपुर की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय की अदालत ने श्रद्धा दुबे को नोटिस जारी किया है। अदालत ने उसे 30 अक्टूबर 2026 को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। पुलिस की पूर्व जांच के अनुसार, कथित ठगी की रकम से खरीदी गई इस कार का पंजीकरण श्रद्धा दुबे के नाम पर कराया गया था।

यह मामला साइबर क्राइम थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 83/2024 से जुड़ा है। जांच के दौरान पुलिस ने स्कोडा कार संख्या DL6CM3920 को जब्त किया था। इसके बाद से वाहन साइबर क्राइम थाने में खड़ा है। अब पीड़ित डॉक्टर की ओर से कार को रिलीज कराने के लिए अदालत में अर्जी दी गई है। 16 अक्टूबर को जारी नोटिस के बाद 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में संबंधित पक्षों की दलीलें सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल वाहन को छोड़ने के संबंध में अदालत का कोई अंतिम आदेश नहीं आया है।

आयुष्मान योजना के भुगतान के नाम पर 90 लाख से ज्यादा की ठगी

डॉ. प्रभात कुमार वर्मा का सहारनपुर के देहरादून रोड पर अस्पताल है। उनका अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध है, जहां योजना के पात्र मरीजों का इलाज किया जाता है। डॉक्टर के मुताबिक, करीब दो साल पहले उनके पास लखनऊ से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को आयुष्मान योजना से जुड़ा अधिकारी बताते हुए दावा किया कि अस्पताल का भुगतान हो चुका है और यदि वे चाहें तो पूरी रकम जल्द जारी कराई जा सकती है।

डॉ. वर्मा के अनुसार, फोन करने वाले ने भुगतान जल्दी कराने के बदले कथित तौर पर बड़े अधिकारियों के नाम पर मोटी रकम मांगी। लंबे समय से अटके भुगतान को निकलवाने की उम्मीद में उन्होंने अलग-अलग किस्तों में 90 लाख रुपये से अधिक की रकम भेज दी। बाद में उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने जांच शुरू की तो कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया। जांच के दौरान ठगी की रकम से स्कोडा कार खरीदे जाने की बात सामने आई। पुलिस की पूर्व जांच के मुताबिक, लखनऊ निवासी अंकित जायसवाल ने कथित तौर पर इस रकम का इस्तेमाल कार खरीदने में किया था और बाद में उसका पंजीकरण श्रद्धा दुबे के नाम पर कराया गया।

दिसंबर 2024 में तीन आरोपी हुए थे गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने दिसंबर 2024 में अंकित जायसवाल समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 317(4) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत कार्रवाई की गई है। जब्त कार को रिलीज कराने की अर्जी पर अब अदालत में सुनवाई होनी है।

डॉ. प्रभात वर्मा को उम्मीद है कि उन्हें उनकी रकम से खरीदी गई कार वापस मिल सकेगी और आरोपियों को सजा मिलेगी। हालांकि, वाहन किसे सौंपा जाएगा, इसका फैसला अदालत संबंधित दस्तावेजों, स्वामित्व के तथ्यों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करने के बाद करेगी।

शिवा शर्मा हत्याकांड में भी तलाश का दावा

श्रद्धा दुबे का नाम लखनऊ के शिवा शर्मा हत्याकांड में भी सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में पुलिस उसकी तलाश कर रही है और उसकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया गया है। हालांकि, साइबर ठगी और हत्या से जुड़े दोनों मामले अलग-अलग हैं और उनकी कानूनी प्रक्रिया भी स्वतंत्र है।

किसी वाहन का पंजीकरण किसी व्यक्ति के नाम होने मात्र से अपराध में उसकी संलिप्तता स्वतः साबित नहीं होती। इसी तरह, किसी मामले में आरोप लगाए जाने को दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता।

30 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अदालत ने श्रद्धा दुबे को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। अब 30 अक्टूबर को प्रस्तावित सुनवाई में वाहन को रिलीज कराने की अर्जी पर आगे की कार्रवाई तय होगी। पीड़ित डॉक्टर की मांग, वाहन से जुड़े दस्तावेज और संबंधित पक्षों का रुख इस मामले में अहम रहेगा। फिलहाल स्कोडा कार साइबर क्राइम थाने में जब्त है। इसे रिलीज करने या किसी पक्ष को सौंपने के संबंध में अंतिम निर्णय अदालत को लेना है।

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