चंडीगढ़ : हरियाणा में युवाओं को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक में पीएम-सेतु योजना के क्रियान्वयन और बजट प्रावधानों को मंजूरी दी गई। इसके तहत कुरुक्षेत्र आईटीआई क्लस्टर की 320.44 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना का उद्देश्य सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक बनाना और युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करना है।
कुरुक्षेत्र क्लस्टर पर खर्च होंगे 320.44 करोड़
कुरुक्षेत्र क्लस्टर परियोजना पर कुल 320.44 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें केंद्र सरकार 160.22 करोड़ रुपये, हरियाणा सरकार 105.75 करोड़ रुपये और एंकर इंडस्ट्री पार्टनर 54.47 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मेसर्स जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड को दी गई है।
इस क्लस्टर में राजकीय आईटीआई कुरुक्षेत्र को हब संस्थान बनाया गया है। इसके साथ महिला आईटीआई कुरुक्षेत्र, आईटीआई कैथल, आईटीआई पेहोवा, आईटीआई पाबनावा, महिला आईटीआई अंबाला शहर और महिला आईटीआई कैथल को स्पोक संस्थानों के रूप में शामिल किया गया है।
परियोजना में 163.06 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के तहत बुनियादी ढांचे, मशीनरी और प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण पर खर्च होंगे। वहीं, 157.38 करोड़ रुपये परिचालन खर्च के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें राज्य सरकार और उद्योग भागीदार मिलकर वहन करेंगे।
प्रदेश में 12 क्लस्टर विकसित करने की योजना
हरियाणा में पीएम-सेतु योजना के तहत लगभग 60 सरकारी आईटीआई को शामिल करते हुए 12 क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इन पर कुल अनुमानित खर्च 2,892 करोड़ रुपये होगा, जिसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी करीब 954 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
प्रदेश में अब तक सात क्लस्टरों की पहचान हो चुकी है। कुरुक्षेत्र क्लस्टर की रणनीतिक निवेश योजना को राष्ट्रीय संचालन समिति से मंजूरी मिल चुकी है। कलायत क्लस्टर की योजना जनवरी 2027 के बाद तैयार की जाएगी। पलवल, सोनीपत और छारा क्लस्टरों के लिए अनुरोध प्रस्ताव (RFP) जारी किए जा चुके हैं, जबकि पानीपत और रेवाड़ी के लिए दिसंबर में आरएफपी जारी करने की योजना है।
देशभर में 60 हजार करोड़ रुपये की योजना
पीएम-सेतु योजना का राष्ट्रीय बजट 60,000 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार 30,000 करोड़ रुपये, राज्य सरकारें 20,000 करोड़ रुपये और उद्योग जगत 10,000 करोड़ रुपये का योगदान देगा। योजना के तहत देशभर के 1,000 सरकारी आईटीआई और पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से लैस उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है।
योजना में हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाया जाएगा। इसके तहत एक प्रमुख आईटीआई के साथ अन्य प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ा जाएगा। यहां आधुनिक मशीनरी, डिजिटल लर्निंग और उद्योग आधारित प्रशिक्षण की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। संचालन के लिए धारा-8 कंपनी बनाई जाएगी, जिसमें उद्योग भागीदार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 24.5-24.5 प्रतिशत रहेगी।
पांच साल के लिए बजट मंजूर
बैठक में योजना के लिए अलग बजट हेड खोलने और वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुरुक्षेत्र क्लस्टर के लिए राज्य सरकार की 105.75 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी के प्रावधान को मंजूरी दी गई। चालू वित्त वर्ष में परियोजना संचालन के लिए राज्य के हिस्से की 10 प्रतिशत अग्रिम राशि जारी करने की अनुमति भी दी गई।
सरकार को उम्मीद है कि पीएम-सेतु योजना से आईटीआई में प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधरेगी। युवाओं को आधुनिक तकनीक और उद्योगों की मांग के अनुसार कौशल मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उन्हें बेहतर वेतन वाली नौकरियों के अवसर मिल सकेंगे।

