लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर रविवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची की स्थिति, बूथ स्तर तक संगठन के पुनर्गठन और चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों के चयन की समीक्षा की गई।
मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि मतदाता सूची से बाहर हुए पात्र लोगों के नाम दोबारा जुड़वाने के लिए पार्टी स्तर पर अभियान जारी रखा जाए। उन्होंने खास तौर पर गरीब, युवा, महिलाओं और कमजोर तबकों के मतदाताओं को लेकर चिंता जताई।
9 लाख से अधिक नाम हटने का मुद्दा
उत्तराखंड में SIR के बाद तीन अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अंतिम सूची में 71,58,949 मतदाता हैं। SIR शुरू होने के समय राज्य में 79,60,762 मतदाता थे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार पुनरीक्षण के दौरान कुल 9,31,685 नाम पिछली सूची से हटे, जबकि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद 1,29,872 नए नाम जोड़े गए।
मायावती ने कहा कि SIR की प्रक्रिया के कारण यदि किसी पात्र नागरिक का नाम छूट गया है तो उसे दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। चुनाव आयोग ने भी अंतिम सूची में शामिल न हो पाए पात्र मतदाताओं के लिए दोबारा नामांकन की प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने के निर्देश
बैठक में मायावती ने उत्तराखंड में पोलिंग बूथ स्तर तक पार्टी कमेटियों के पुनर्गठन की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने संगठन में रह गई कमियों को जल्द पूरा करने और चुनावी तैयारियों को गति देने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही आगामी चुनाव के लिए मजबूत उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी पदाधिकारियों से जानकारी ली गई। पार्टी की तैयारियों में संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना अहम मुद्दा रहा।
भाजपा सरकार पर लगाया आरोप
मायावती ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार की कार्यशैली पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों और आम लोगों के जनहित से जुड़े मुद्दों की अपेक्षा बड़े पूंजीपतियों और धन्नासेठों के हितों को अधिक महत्व दे रही है।
उन्होंने चुनाव में धनबल के प्रभाव को भी मुद्दा बताते हुए कहा कि आने वाले चुनाव में यह विषय पार्टी के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि ये मायावती और बसपा के राजनीतिक आरोप हैं।
कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में कार्यक्रम
बैठक में बसपा संस्थापक कांशीराम की नौ अक्टूबर को होने वाली पुण्यतिथि की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मायावती ने बताया कि इस बार पार्टी कार्यकर्ता यूपी-दिल्ली सीमा स्थित बहुजन प्रेरणा केंद्र के बजाय लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
बैठक में चुनावी रणनीति के साथ संगठन को मजबूत करने और मतदाता सूची में पात्र लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। उत्तराखंड में SIR के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची के आंकड़े अब आगामी चुनावी तैयारियों के बीच राजनीतिक दलों के लिए भी अहम मुद्दा बन गए हैं।

