अंबाला : उम्र महज चार साल, लेकिन याददाश्त और पहचानने की क्षमता ऐसी कि हर कोई उसकी प्रतिभा की चर्चा कर रहा है। अंबाला जिले के महमूदपुर गांव के चार वर्षीय मयन सैनी ने दुनिया के देशों, उनके झंडों और विश्व मानचित्र की पहचान में अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए दो विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। मयन की उपलब्धि से उसके परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीण उसके माता-पिता की मेहनत और बच्चे की प्रतिभा की सराहना कर रहे हैं।
1 मिनट 44 सेकंड में 195 देशों के झंडे पहचाने
मयन ने अपना पहला विश्व रिकॉर्ड 12 मई 2026 को अंबाला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बनाया। उसने महज 1 मिनट 44 सेकंड में 195 देशों के राष्ट्रीय झंडों को पहचानकर उनके नाम बताए। उसकी तेज और सटीक पहचान को देखते हुए इस उपलब्धि को वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
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इतनी कम उम्र में मयन की झंडों को पहचानने की क्षमता ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। एक के बाद एक अलग-अलग देशों के झंडे सामने आने पर मयन ने तेजी से उनके नाम बताए। परिवार के मुताबिक, यह उपलब्धि अचानक नहीं मिली, बल्कि उसकी लंबे समय से चली आ रही रुचि और अभ्यास का परिणाम है।
वर्ल्ड मैप पर भी दिखाई अद्भुत पकड़
पहले रिकॉर्ड के बाद मयन ने दूसरी उपलब्धि हासिल की। 10 जुलाई 2026 को उसने रंगीन ब्लैंक वर्ल्ड मैप पर महाद्वीपवार देशों की सही पहचान की। उस समय उसकी उम्र 4 साल 8 माह 10 दिन थी। मयन ने यह पूरा काम सिर्फ 2 मिनट 19.8 सेकंड में पूरा किया।
इस उपलब्धि के लिए उसे इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से सितंबर में प्रमाण-पत्र भी मिला। एक ही वर्ष में दो अलग-अलग रिकॉर्ड हासिल करने से मयन की प्रतिभा को नई पहचान मिली है।
ग्लोब और झंडों में शुरू से थी दिलचस्पी
मयन की मां मधू सैनी बताती हैं कि बेटे की रुचि छोटी उम्र से ही दुनिया के देशों और उनके झंडों को जानने में रही है। दूसरे बच्चों की तरह जहां सामान्य खिलौने उसकी पसंद हो सकते थे, वहीं मयन को ग्लोब और झंडों वाली किताबों को देखना ज्यादा पसंद था। वह लंबे समय तक ग्लोब को देखता और अलग-अलग देशों के बारे में जानने की कोशिश करता था।
मां के मुताबिक, परिवार ने उसकी इस रुचि को समझा और पढ़ाई का दबाव डालने के बजाय सीखने की प्रक्रिया को खेल से जोड़ दिया। झंडों वाले कार्ड, ग्लोब और नक्शे के जरिए उसे देशों की पहचान कराई गई।
खेल-खेल में मजबूत हुई याददाश्त
मधू सैनी ने बताया कि मयन को रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान ही देशों और झंडों की जानकारी दी जाती थी। धीरे-धीरे उसने खुद इसमें रुचि लेना शुरू कर दिया। लगातार अभ्यास से उसकी याद रखने और पहचानने की क्षमता बेहतर होती गई।
मयन के पिता रोहित सैनी ने भी उसकी रुचि को आगे बढ़ाने में सहयोग किया। उनका कहना है कि बच्चे को जिस विषय में दिलचस्पी हो, उसी को सीखने का माध्यम बनाना ज्यादा प्रभावी रहता है। मयन को देशों और झंडों में रुचि थी, इसलिए परिवार ने उसी दिशा में उसका अभ्यास जारी रखा।
गांव में खुशी का माहौल
मयन की दोहरी उपलब्धि के बाद महमूदपुर गांव में भी उत्साह है। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी कम उम्र में बच्चे ने जिस तरह दुनिया के देशों और नक्शे की पहचान की है, वह उसके विशेष अभ्यास और प्रतिभा को दिखाता है।
मयन की कहानी यह भी बताती है कि बच्चों पर केवल पढ़ाई का दबाव डालने के बजाय उनकी स्वाभाविक रुचि को समझकर सीखने का अवसर दिया जाए तो उनकी प्रतिभा को बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता है। चार साल की उम्र में दो विश्व रिकॉर्ड बनाने वाला मयन अब अपने परिवार के साथ गांव के लोगों के लिए भी गर्व का विषय बन गया है।

