लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने राजनीतिक अभियान में लोकतंत्र, सामाजिक सम्मान, रोजगार और सरकारी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को लोकतंत्र सेनानियों से मुलाकात की। उन्होंने उनके संघर्ष और सुझावों को सुना तथा सरकार बनने पर सम्मान राशि बढ़ाकर 51 हजार रुपये प्रतिमाह करने का ऐलान किया। अखिलेश ने लोकतंत्र सेनानियों के इलाज, दवाओं और यात्रा सुविधाओं से जुड़ी मांगों को भी समाजवादी पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने की बात कही।
सम्मान राशि बढ़ाने का वादा
लोकतंत्र सेनानियों से मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उनकी मासिक सम्मान राशि बढ़ाकर 51 हजार रुपये की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में लोकतंत्र सेनानियों को इलाज और दवाओं की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इसके अलावा ट्रेन और बस यात्रा से जुड़ी उनकी मांगों को भी पार्टी के घोषणापत्र में शामिल करने की बात कही।
उत्तर प्रदेश सरकार के उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक लोकतंत्र सेनानियों और उनके निधन के बाद पात्र पति या पत्नी को वर्तमान व्यवस्था में 20 हजार रुपये प्रतिमाह सम्मान राशि मिलती है। सरकारी अस्पतालों में निशुल्क चिकित्सा और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में एक सहयोगी के साथ निशुल्क यात्रा की सुविधा का भी प्रावधान है।
ऐसे में अखिलेश यादव की घोषणा मौजूदा सम्मान राशि से जुड़े प्रस्तावित बदलाव के तौर पर सामने आई है। चुनाव से पहले सपा की ओर से की जा रही घोषणाओं में सम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे लगातार दिखाई दे रहे हैं।
गोरखपुर के जलभराव पर हमला
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोरखपुर में हुए जलभराव को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में जलभराव और जलनिकासी की समस्या सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। इससे पहले 27 सितंबर को भी अखिलेश यादव ने लखनऊ, गोरखपुर और दूसरे शहरों में जलभराव को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे। उन्होंने जलनिकासी व्यवस्था को कथित भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा था।
गुरुवार को अखिलेश ने दावा किया कि गोरखपुर में कथित भ्रष्टाचार का वीडियो बनाने वाले एक युवक पर गुंडा एक्ट लगा दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पानी भरने की तस्वीर या वीडियो बनाने पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन या सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन बातों को अखिलेश यादव द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
गोरखपुर में जलभराव का मुद्दा पिछले कुछ दिनों से प्रदेश की राजनीति में चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सितंबर में गोरखपुर में करीब 40 करोड़ रुपये की 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया था। साथ ही सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण भी किया था।
PDA और ‘इमरजेंसी’ का जिक्र
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में PDA वर्ग से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिस दौर में PDA वर्ग पर अत्याचार होगा, उसे इमरजेंसी के दौर के तौर पर देखा जाएगा। उन्होंने बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर भी भाजपा सरकार पर आरोप लगाए। सपा पिछले कुछ समय से पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को केंद्र में रखकर PDA की राजनीतिक रणनीति पर जोर दे रही है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी आरक्षण, सामाजिक भागीदारी, रोजगार और सरकारी भर्तियों जैसे मुद्दों को अपने अभियान में शामिल कर रही है। अखिलेश का यह बयान इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के बीच आया है। हालांकि किसी राजनीतिक दल द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन अलग-अलग आधिकारिक आंकड़ों और रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना जरूरी है।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान लगाए गए बड़े-बड़े होर्डिंग्स का जिक्र किया और पूछा कि इन्हें किसने लगवाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को कार्यालय बनाने के बजाय चुनाव आयोग में ही एक फ्लोर ले लेना चाहिए। अखिलेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘इंडियन डेमोक्रेसी ऑन टारगेट’ लिखी तस्वीर भी दिखाई।
अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद का जिक्र करते हुए सपा अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें चुनाव में हराने के लिए कई प्रयास किए गए। इन टिप्पणियों के जरिए अखिलेश यादव ने चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर अपनी पार्टी की चिंताओं को सामने रखा। हालांकि चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों का मूल्यांकन संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और आयोग के फैसलों के आधार पर ही किया जा सकता है।
कॉर्पोरेट निवेश पर जोर
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए सरकारी निवेश के साथ कॉर्पोरेट निवेश को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की पहुंच कॉर्पोरेट जगत तक भी होनी चाहिए। यह बयान रोजगार और औद्योगिक विकास के मुद्दे से जुड़ा है। सपा की ओर से आगामी चुनावी तैयारी में युवाओं के रोजगार, निवेश और विकास से जुड़े सवालों को भी प्रमुखता दी जा रही है।
पुलिस व्यवस्था पर निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने पुलिस व्यवस्था को लेकर भी भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पुलिस पर भरोसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में समय-समय पर सवाल उठे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस भाजपा के कार्यकर्ता की तरह काम कर रही है। यह टिप्पणी अखिलेश यादव का राजनीतिक आरोप है। ऐसे आरोपों के मूल्यांकन के लिए संबंधित मामलों, न्यायिक टिप्पणियों और सरकारी रिकॉर्ड को अलग-अलग देखना जरूरी होगा।
2027 से पहले बढ़ रही राजनीतिक सक्रियता
अखिलेश यादव के हालिया बयानों में कई अलग-अलग मुद्दे एक साथ दिखाई दे रहे हैं। लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, PDA, रोजगार, भ्रष्टाचार, जलभराव, पुलिस व्यवस्था, चुनाव आयोग और कॉर्पोरेट निवेश—सपा इन मुद्दों को आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक बहस से जोड़ रही है। लोकतंत्र सेनानियों के लिए 51 हजार रुपये प्रतिमाह सम्मान राशि का ऐलान इसी अभियान का हिस्सा है। मौजूदा सरकारी व्यवस्था में 20 हजार रुपये प्रतिमाह सम्मान राशि के साथ चिकित्सा और बस यात्रा की सुविधाएं पहले से लागू हैं।
अब चुनाव 2027 तक पहुंचने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सपा इन घोषणाओं को अपने अंतिम घोषणापत्र में किस रूप में शामिल करती है और भाजपा इन मुद्दों पर क्या जवाब देती है। फिलहाल अखिलेश यादव के बयान से यह संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी आने वाले चुनाव में सामाजिक सम्मान के साथ रोजगार, विकास, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सरकारी व्यवस्था से जुड़े सवालों को भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

