लखनऊ : सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता विकास तथा प्रशिक्षण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। मिशन कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुक्रवार को प्रदेश को सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि में गृह विभाग की अहम भूमिका रही, जिसने अकेले एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए। रैंकिंग में राजस्थान दूसरे और जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सफलता के लिए संबंधित अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रयासों की सराहना की।
डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) और भारत सरकार के क्षमता विकास आयोग की ओर से आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला में उत्तर प्रदेश को यह सम्मान दिया गया। प्रदेश की ओर से उपाम के महानिदेशक एम. देवराज, निदेशक संजय कुमार तथा अपर निदेशक एवं नोडल अधिकारी सुनील कुमार चौधरी को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
19.23 लाख उपयोगकर्ता आईजीओटी प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत
मिशन कर्मयोगी के तहत उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण को प्रशासनिक प्राथमिकता दी गई है। आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के लगभग 19.23 लाख उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं। इनमें 99 प्रतिशत से अधिक सक्रिय बताए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, उन्नति पहल के तहत प्रदेश में 350 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों का पंजीकरण किया गया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना और उन्हें उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षित करना है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गृह विभाग ने पूरे किए एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम
विभागीय प्रदर्शन की श्रेणी में उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने पहला स्थान हासिल किया। विभाग ने अकेले एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए। इस उपलब्धि के लिए गृह विभाग की ओर से डीजी ट्रेनिंग राजीव अग्रवाल और डीआईजी देव रंजन वर्मा ने सम्मान प्राप्त किया।
वहीं, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग को संबंधित श्रेणी में दूसरा पुरस्कार मिला। विभाग में भी एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए गए हैं। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने विभाग की ओर से सम्मान ग्रहण किया।
उच्च शिक्षा विभाग ने श्रेणी ख में पहला स्थान हासिल किया, जबकि अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग दूसरे स्थान पर रहा। श्रेणी ग में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को प्रथम और प्रशासनिक सुधार विभाग को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
कार्यशाला में क्षमता विकास आयोग की प्रमुख पहलों के तहत उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स और नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क की शुरुआत की गई। इन पहलों का उद्देश्य प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार करना और अधिकारियों के प्रशिक्षण को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
उन्नति कैपेबिलिटी इंडेक्स के माध्यम से देशभर के प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता, गुणवत्ता और प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। इसके तहत संस्थानों को तीन संकेतकों और सात क्षेत्रों के आधार पर स्टार रेटिंग दी जाएगी। मूल्यांकन में संकाय, पाठ्यक्रम और संस्थागत ढांचे से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाएगा। संस्थानों की तुलना उनकी समान श्रेणी के दूसरे संस्थानों से भी की जाएगी।
पहले प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता का मूल्यांकन दो साल में एक बार किया जाता था। नई व्यवस्था में नियमित समीक्षा और निरंतर सुधार पर जोर दिया जाएगा।
चार स्तरों पर तैयार होगा प्रशिक्षण का ढांचा
नेशनल करिकुलम डिजाइन फ्रेमवर्क के तहत प्रशिक्षण को चार स्तरों में बांटा गया है—बुनियादी, निपुणता, उन्नत और विशेषज्ञता। यह रूपरेखा अधिकारियों की भूमिका, कार्य की जटिलता और अपेक्षित दक्षताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने में प्रशिक्षण संस्थानों की मदद करेगी।
यह फ्रेमवर्क कर्मयोगी क्वालिटी फ्रेमवर्क और कर्मयोगी कॉम्पिटेंसी मॉडल पर आधारित है। इसका उद्देश्य अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुसार बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में उपाम ने अन्य राज्य प्रशिक्षण संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।

