सहारनपुर : शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर सहारनपुर के अंबाला रोड स्थित स्वामी रामतीर्थ केंद्र में भक्ति और आध्यात्मिक साधना का विशेष वातावरण बना हुआ है। यहां आयोजित 152वें श्री यंत्र महाअनुष्ठान में देश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ विदेशों से आए श्रद्धालु भी हिस्सा ले रहे हैं। इस बार जर्मनी और लातविया से पहुंचीं महिलाओं की सहभागिता विशेष आकर्षण बनी हुई है। विदेशी श्रद्धालु भारतीय धार्मिक परंपराओं के अनुरूप मां भगवती की पूजा-अर्चना कर रही हैं। वे संस्कृत मंत्रों का उच्चारण करने के साथ भजन-कीर्तन में भी शामिल हो रही हैं।
11 अक्टूबर से शुरू हुआ यह महाअनुष्ठान नवरात्र की नवमी तक चलेगा। आयोजन के दौरान श्री यंत्र की उपासना, दीप साधना और शक्ति आराधना के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। केंद्र में सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है। मंत्रोच्चार, भजनों और दीपों की रोशनी के बीच पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहता है।
300 से अधिक दीपों के बीच विशेष साधना
श्री यंत्र महाअनुष्ठान आचार्य सर्वेश्वर नाथ प्रभाकर और आचार्य गंगेश्वर नाथ प्रभाकर के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। इसमें 300 से अधिक दीप प्रज्वलित कर विशेष दीप साधना की जाती है। आयोजन में मां महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की आराधना पर विशेष जोर दिया जाता है।
आयोजकों के अनुसार, अनुष्ठान के दौरान प्रज्वलित अग्निशिखा दस फीट से अधिक ऊंचाई तक उठती दिखाई देती है। अग्निशिखा और दीपों के बीच श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं तथा धार्मिक मंत्रों का जाप करते हैं। यह दृश्य अनुष्ठान में शामिल होने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है।
श्री यंत्र साधना को केंद्र में रखते हुए पूजा की पारंपरिक विधियों का पालन किया जाता है। नवरात्र के दिनों में यहां आने वाले श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के साथ आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव भी करते हैं।
जर्मनी और लातविया की महिलाओं ने गाए मां के भजन
इस बार जर्मनी से आईं तान्या और लातविया से पहुंचीं गायत्री तथा इंद्रा फ्रेमाने अनुष्ठान में भाग ले रही हैं। वे भारतीय श्रद्धालुओं के साथ बैठकर पूजा करती हैं और भक्ति गीतों में शामिल होती हैं। ‘जागो-जागो रे ज्वाला माई जागो’ जैसे भजनों के दौरान विदेशी महिलाओं की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिलती है।
इसके अलावा वे ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ जैसे संस्कृत मंत्रों का भी उच्चारण करती हैं। पूजा के बाद श्रद्धालु पवित्र अग्निशिखा की परिक्रमा करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। भारतीय धार्मिक रीति-रिवाजों के प्रति विदेशी महिलाओं की रुचि आयोजन को एक अलग पहचान दे रही है।
उनकी भागीदारी यह भी दिखाती है कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएं विदेशों से आने वाले लोगों को भी आकर्षित करती हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ मिलकर पूजा करना, भजन गाना और मंत्रोच्चार में शामिल होना सांस्कृतिक जुड़ाव का उदाहरण बन रहा है।
संस्थापक की परंपरा को आगे बढ़ा रहा केंद्र
स्वामी रामतीर्थ केंद्र में इस महाअनुष्ठान की परंपरा को संस्थापक स्वर्गीय केदारनाथ प्रभाकर की विरासत के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। डॉ. आभा प्रभाकर और आर्किटेक्ट शांभवी प्रभाकर भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आयोजन में धार्मिक विधि-विधान और शक्ति उपासना को प्रमुखता दी जाती है।
केंद्र में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। पूजा, दीप प्रज्वलन और भजन-कीर्तन के जरिए भक्त मां भगवती की आराधना करते हैं। आयोजकों का प्रयास है कि पारंपरिक साधना और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी परंपरा निरंतर जारी रहे।
कई प्रतिष्ठित हस्तियों के आने का दावा
केंद्र के संचालक आचार्य गंगेश्वर नाथ प्रभाकर के अनुसार, वर्षों से आयोजित हो रहे इस धार्मिक कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित हस्तियां भी शामिल हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पी.वी. नरसिम्हा राव, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, भजनलाल और बंसीलाल सहित कई प्रमुख व्यक्तित्व केंद्र से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे, उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल सूरजभान, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रशांत कुमार, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और पाकिस्तान से आए कुछ प्रतिष्ठित लोगों के आगमन का भी उल्लेख किया।
आस्था और संस्कृति का संगम
शारदीय नवरात्र के दौरान आयोजित 152वां श्री यंत्र महाअनुष्ठान सहारनपुर में धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। विदेशी महिलाओं की भागीदारी, संस्कृत मंत्रों का उच्चारण और पारंपरिक भजनों की गूंज इस आयोजन को खास बना रही है। दीपों की रोशनी और शक्ति आराधना के बीच यहां भारतीय संस्कृति तथा आध्यात्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिल रही है।

