गोरखपुर : बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज (BRD) की कैंसर यूनिट में कोबाल्ट मशीन खराब होने से रेडियोथेरेपी की सुविधा प्रभावित हो गई है। मशीन दो सप्ताह से अधिक समय से बंद बताई जा रही है। इसका सीधा असर उन कैंसर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें डॉक्टरों की सलाह के अनुसार तय अंतराल पर रेडिएशन थेरेपी की जरूरत होती है। दूर-दराज के जिलों से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को अब दूसरे केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
बैटरी और UPS खराब होने से बंद हुई मशीन
कैंसर यूनिट में रेडियोथेरेपी के लिए इस्तेमाल होने वाली कोबाल्ट मशीन के UPS और बैटरी में खराबी आने की बात सामने आई है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक मशीन की बैटरी मंगा ली गई है, जबकि UPS भी डिस्पैच हो चुका है। प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि दो-तीन दिन में UPS पहुंचने के बाद मशीन को दोबारा चालू करने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि, मशीन की आपूर्ति और रखरखाव से जुड़ी कंपनी का करीब 8 लाख रुपये का भुगतान बकाया होने की बात भी सामने आई है। बजट की समस्या के चलते भुगतान और मरम्मत की प्रक्रिया प्रभावित होने की स्थिति बनी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन अब रोगी कल्याण निधि के जरिए समस्या दूर करने का प्रयास कर रहा है।
कंपनी से शासन तक पत्राचार
प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक कैंसर यूनिट पर मरीजों का काफी दबाव है। यहां रेडियोथेरेपी के साथ कैंसर के ऑपरेशन और अन्य उपचार भी होते हैं। उन्होंने कहा कि पदभार संभालने के बाद यूनिट से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए कंपनी से लेकर शासन स्तर तक पत्राचार किया जा रहा है।
इलाज में देरी बढ़ा सकती है मरीजों की परेशानी
रेडियोथेरेपी कैंसर उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है और कई मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निश्चित अंतराल पर इसकी जरूरत होती है। ऐसे में मशीन लंबे समय तक बंद रहने से पुराने मरीजों का शेड्यूल प्रभावित होने के साथ नए मरीजों की वेटिंग भी बढ़ सकती है।
BRD मेडिकल कॉलेज में रेडियोथेरेपी की सुविधा अपेक्षाकृत कम खर्च में उपलब्ध होती है। निजी कैंसर अस्पतालों में एक दिन की रेडियोथेरेपी का खर्च हजारों रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में सरकारी सुविधा बंद होने पर मरीजों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो सकता है।
दूसरे केंद्रों पर भी सीमित विकल्प
गोरखपुर AIIMS में रेडियोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन वहां मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची बताई जाती है। महायोगी गोरखनाथ और संबंधित संस्थान में भी रेडियोथेरेपी की सुविधा है, लेकिन वहां पहले से पंजीकृत मरीजों का उपचार चलता है। ऐसे में BRD के मरीजों को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था मिलना आसान नहीं है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि बैटरी और UPS की व्यवस्था होने के बाद मशीन जल्द शुरू कर दी जाएगी। लेकिन जब तक रेडियोथेरेपी बहाल नहीं होती, कैंसर मरीजों की परेशानी और इलाज के इंतजार का दबाव बना रह सकता है।

