मायावती का अखिलेश पर निशाना, बोलीं- सपा को चाहिए PDA का वोट, टिकट में परिवार और धनबल

Mayawati targets Akhilesh, says SP seeks PDA votes but prioritizes family and money power in ticket distribution.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए पीडीए की राजनीति पर सवाल उठाए हैं। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि सपा चुनाव में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के वोट मांगती है, लेकिन टिकट वितरण में परिवार और आर्थिक रूप से प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता देती है।

रामगोपाल और नाथवानी की उम्मीदवारी पर सवाल

मायावती ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवारों का जिक्र किया। सपा ने उत्तर प्रदेश से वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने 30 सितंबर को अखिलेश यादव की मौजूदगी में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है।

मायावती ने रामगोपाल यादव की उम्मीदवारी को सपा के परिवारवाद से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए। वहीं धनराज नाथवानी को लेकर उन्होंने पार्टी की पीडीए राजनीति पर निशाना साधा। नाथवानी कॉरपोरेट और खेल प्रशासन से जुड़े रहे हैं और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ पद पर कार्य कर चुके हैं।

‘पीडीए सिर्फ ढोंग और छलावा’

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का पीडीए सामाजिक न्याय के बजाय राजनीतिक ढोंग और छलावा है। उन्होंने कहा कि सपा को चुनाव में पीडीए वर्ग का वोट चाहिए, लेकिन सांसद और विधायक बनाने के लिए परिवार के लोगों तथा बड़े पूंजीपतियों को आगे किया जाता है।

मायावती ने दावा किया कि बसपा परिवारवाद की राजनीति से अलग है और चुनाव में अपने परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों को टिकट देने की परंपरा नहीं अपनाती। उनके मुताबिक, पार्टी संगठन में काम करने वाले गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों के कार्यकर्ताओं को चुनावी राजनीति में अवसर देने पर जोर देती है।

तीसरे उम्मीदवार पर भी कसा तंज

मायावती ने सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि तीसरा उम्मीदवार भी संभवत: ‘फेस सेविंग’ के लिए मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि, उस समय तक सपा की ओर से तीसरे उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी।

राज्यसभा चुनाव में सपा के उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक चर्चा पहले से तेज है। धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर सपा के भीतर और बाहर भी सवाल उठे हैं। वहीं सपा की ओर से उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी का आधिकारिक पक्ष अलग हो सकता है।

विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी बयानबाजी

मायावती का यह हमला ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। सपा अपनी राजनीति में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों के मुद्दों को प्रमुखता देती रही है। बसपा भी इन वर्गों के बीच अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

मायावती ने अपने पोस्ट में दलित, आदिवासी, अति पिछड़े, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक वर्गों के साथ गरीब सवर्णों से भी सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि इन वर्गों का भविष्य बसपा में सुरक्षित है। इस बयान के बाद राज्यसभा उम्मीदवारों का मुद्दा अब सपा के पीडीए फॉर्मूले, परिवारवाद और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई राजनीतिक बहस का आधार बन गया है।

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