UP 2027: कांग्रेस की सपा को दो टूक- सम्मानजनक सीटें दो, वरना अकेले लड़ेंगे!

Maharashtra Assembly Elections

लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी दूर हों, लेकिन विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि वह समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन जारी रखने के पक्ष में है, लेकिन इस बार वह बिहार जैसी स्थिति नहीं चाहती। पार्टी ने कहा है कि उसे उत्तर प्रदेश में सम्मानजनक सीट बंटवारा चाहिए और कम से कम उतनी सीटें मिलनी चाहिए जितनी 2017 के विधानसभा चुनाव में मिली थीं।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा को हराने के लिए विपक्षी एकता जरूरी है, लेकिन गठबंधन तभी मजबूत होगा जब सभी सहयोगी दलों को उचित सम्मान मिले। पार्टी का मानना है कि सीटों का बंटवारा केवल संख्या के आधार पर नहीं बल्कि जीत की संभावना और जमीनी ताकत को ध्यान में रखकर होना चाहिए।

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी एआईसीसी सचिव राजेश तिवारी ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के अनुभव से पार्टी ने सबक लिया है। उनका कहना है कि बिहार में कांग्रेस को कई ऐसी सीटें दी गईं जहां जीत की संभावना बेहद कम थी। इसके अलावा कई स्थानों पर सहयोगी दलों के बीच दोस्ताना मुकाबले भी हुए, जिससे पूरे गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस नहीं चाहती कि उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही दोहराया जाए।

राजेश तिवारी ने कहा कि कांग्रेस को कम से कम 105 सीटें मिलनी चाहिए, क्योंकि 2017 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के दौरान पार्टी ने इतनी सीटों पर चुनाव लड़ा था। उनका दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस संगठन मजबूत हुआ है और पार्टी की राजनीतिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है। ऐसे में उसे 105 से अधिक सीटों की भी उम्मीद है।

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यदि गठबंधन सम्मानजनक नहीं हुआ तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ने के विकल्प पर भी विचार कर सकती है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में कांग्रेस के पास खोने के लिए बहुत कम है, जबकि समाजवादी पार्टी के लिए दांव काफी बड़ा है क्योंकि वह 2017 से सत्ता से बाहर है और 2027 में सरकार बनाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन का फायदा दोनों दलों को मिला था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के “संविधान बचाओ” अभियान ने दलित और मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई, जिससे समाजवादी पार्टी को भी लाभ हुआ। उनका कहना है कि भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी एकता जरूरी है और गठबंधन को मजबूत बनाए रखना चाहिए।

हालांकि, कांग्रेस का विधानसभा चुनावों में हालिया प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है। 2017 में पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में 105 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन केवल सात सीटें जीत सकी थी। वहीं 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी संख्या में उम्मीदवार उतारे, लेकिन सिर्फ दो सीटों पर जीत हासिल कर पाई।

समाजवादी पार्टी की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया सामने आई है। सपा के राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने कहा कि सीटों का अंतिम फैसला दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि नेताओं के बयान अपनी जगह हैं, लेकिन गठबंधन की बातचीत हमेशा जमीनी स्थिति, संगठन की ताकत और चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर होती है।

फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारा सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाला है। दोनों दल गठबंधन जारी रखने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन सम्मानजनक सीट साझेदारी को लेकर बातचीत आसान नहीं होगी। आने वाले समय में यही तय करेगा कि विपक्ष भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर चुनाव लड़ेगा या अलग-अलग रास्ते अपनाएगा।

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