लखनऊ : उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली ओवरहेड पेयजल टंकियों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाया है। अब प्रदेश में किसी भी ओवरहेड टंकी का निर्माण मृदा परीक्षण के बिना नहीं किया जाएगा। जल जीवन मिशन ने सभी निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिया है कि टंकी निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित स्थल की मिट्टी की जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए। मृदा की भार वहन क्षमता, संरचना और अन्य तकनीकी मानकों की जांच के बाद ही निर्माण की अनुमति मिलेगी।
सरकार का यह फैसला पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सामने आई टंकियों की दुर्घटनाओं के बाद लिया गया है। कई जगह टंकियां निर्माण के दौरान या पानी भरने के बाद गिर गईं, जबकि कई टंकियों में दरार और रिसाव की शिकायतें भी सामने आईं। जांच में घटिया निर्माण सामग्री, तकनीकी मानकों की अनदेखी और गलत निर्माण प्रक्रिया के अलावा मृदा परीक्षण की कमी को भी गंभीर कारण माना गया।
जून 2024 में मथुरा में करीब छह करोड़ रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि टंकी निर्माण से पहले मिट्टी का परीक्षण नहीं कराया गया था। इसके बाद सीतापुर समेत कई जिलों में बिना सॉइल टेस्ट के टंकियां बनाए जाने की शिकायतें सामने आईं।
अप्रैल 2025 में लखीमपुर खीरी में करीब 3.5 करोड़ रुपये की जिंक एलम टंकी परीक्षण के दौरान फट गई। वहीं, मई 2025 में सीतापुर में करीब 5.31 करोड़ रुपये की लागत वाली टंकी भरभराकर गिर गई। इससे आसपास के गांवों में पानी भर गया। कानपुर में भी टंकी से जुड़ी दुर्घटना सामने आई।
फरवरी 2026 में महोबा में करीब 65 लाख रुपये की लागत से बनी टंकी पानी भरते ही दरक गई। इसके बाद मई 2026 में बरेली के सरदार नगर में निर्माणाधीन टंकी गिरने से कई लोग घायल हुए। बस्ती, सिद्धार्थनगर और अन्य जिलों में भी टंकियों में रिसाव और संरचनात्मक खामियों की शिकायतें सामने आती रही हैं।
अब नए आदेश के तहत मृदा परीक्षण की रिपोर्ट निर्माण एजेंसियों को अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी। गलत रिपोर्ट देने या मृदा परीक्षण की अनदेखी करने पर ठेकेदारों के साथ थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। पहले के कई मामलों में इंजीनियरों को निलंबित या बर्खास्त करने, ठेकेदारों पर जुर्माना लगाने और एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई की जा चुकी है।
जल जीवन मिशन के कार्यकारी निदेशक जोगिंदर सिंह ने बताया कि अब मिट्टी की जांच के बिना किसी भी स्थान पर ओवरहेड टंकी नहीं बनाई जाएगी। जांच के बावजूद यदि निर्माण में गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित जांच एजेंसी और अभियंता की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि मिशन का लक्ष्य वर्ष 2028 तक पूरा किया जाना है और प्रदेश में बनी टंकियों की जांच भी की जा रही है।
सरकार का कहना है कि ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने के साथ निर्माण की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। नए नियम से उम्मीद है कि टंकियां मजबूत नींव पर बनेंगी, दुर्घटनाओं का खतरा घटेगा और सार्वजनिक धन के साथ लोगों की जान की भी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

