राम जन्मभूमि ट्रस्ट के CEO चयन पर विवाद, पूर्व IPS ने उठाए सवाल; ट्रस्ट ने आरोपों को बताया गलत

Controversy over CEO selection of Ram Janmabhoomi Trust, former IPS raised questions; The trust said the allegations were wrong
अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवालों के बीच अब मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति और चयन प्रक्रिया भी विवादों में आ गई है। ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए CEO की नियुक्ति की गई थी, लेकिन अब इसी पद की चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्यता आधारित बताया है।

विवाद उस समय सामने आया जब CEO पद के लिए आवेदन करने वाले सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे ने एक इंटरव्यू में चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनके दावे के मुताबिक ट्रस्ट ने जिन लोगों को अंतिम 16 उम्मीदवारों के तौर पर साक्षात्कार के लिए बुलाया था, उनमें वर्तमान CEO शामिल नहीं थे। उनका आरोप है कि अंतिम चरण के बाद अचानक उन्हें CEO घोषित कर दिया गया।

अमिताभ ठाकुर ने भी मांगा जवाब

राजेश पांडे के आरोपों के बाद पूर्व IPS अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने भी CEO चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। ठाकुर खुद भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के CEO पद के लिए आवेदन कर चुके हैं।

अमिताभ ठाकुर ने इस मामले में ट्रस्ट को पत्र भेजकर चयन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट और संतोषजनक जवाब मांगा है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि यदि राजेश पांडे के आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अंतिम नियुक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे।

ठाकुर ने ट्रस्ट से आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वह चयन प्रक्रिया और नियुक्ति को उचित न्यायिक या वैधानिक मंच के सामने चुनौती देने समेत उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकते हैं।

ट्रस्ट ने आरोपों को बताया गलत

वहीं विवाद बढ़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देवगिरी ने पत्र जारी कर चयन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। ट्रस्ट का कहना है कि CEO चयन को लेकर गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है और तथ्यों को सही तरीके से सामने रखना जरूरी है।

ट्रस्ट के मुताबिक चयन प्रक्रिया के लिए 6 जुलाई को सर्च कमेटी का गठन किया गया था। इसके बाद CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। इन आवेदनों की बहु-स्तरीय स्क्रीनिंग की गई। ट्रस्ट के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, पुणे और संबलपुर में AI स्क्रीनिंग के साथ मैनुअल विशेषज्ञ मूल्यांकन का भी इस्तेमाल किया गया।

16 उम्मीदवार अंतिम चरण में पहुंचे

ट्रस्ट के मुताबिक बहु-स्तरीय मूल्यांकन के बाद 16 उम्मीदवारों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। इन उम्मीदवारों के साथ 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में आमने-सामने बातचीत और साक्षात्कार की प्रक्रिया हुई।

ट्रस्ट ने बताया कि सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने भी 11 अगस्त को पहली पाली में साक्षात्कार प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने 1 सितंबर को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें न्यास को सौंपीं।

ट्रस्ट के अनुसार इसी रिपोर्ट के आधार पर 2 सितंबर को तीन शीर्ष अनुशंसित उम्मीदवारों के नाम मीडिया के सामने रखे गए। इनमें एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (सेवानिवृत्त), संजय प्रताप सिंह विश्वास राव और श्रुति भारद्वाज के नाम शामिल थे।

ट्रस्ट बोला- हर चरण का रिकॉर्ड मौजूद

ट्रस्ट ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि शीर्ष तीन अनुशंसित उम्मीदवारों में जितेंद्र मिश्रा का शामिल होना उनकी साक्षात्कार प्रक्रिया में भागीदारी, मूल्यांकन और योग्यता आधारित चयन का दस्तावेजी प्रमाण है। ट्रस्ट के मुताबिक चयन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का रिकॉर्ड तैयार किया गया और सभी अंतिम उम्मीदवारों की पहचान अयोध्या में दर्ज की गई।

ट्रस्ट ने कहा कि CEO के चयन की प्रक्रिया संस्थागत शासन और पारदर्शिता के मानकों के अनुसार पूरी की गई है। साथ ही ट्रस्ट ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया को लेकर यदि कोई और सवाल उठाए जाते हैं तो उन्हें तथ्यों के आधार पर स्पष्ट किया जाएगा।

फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि क्या वर्तमान CEO वास्तव में अंतिम 16 उम्मीदवारों में शामिल थे और उनकी नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई? एक तरफ आवेदकों की ओर से चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ ट्रस्ट दस्तावेजों और साक्षात्कार प्रक्रिया का हवाला देकर आरोपों को गलत बता रहा है। ऐसे में अब पूरे मामले में सामने आने वाले दस्तावेज और दोनों पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे।

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