श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर 6 दिसंबर को कारसेवा के ऐलान से हलचल, संतों की मांग पर उलेमाओं ने जताई चिंता

Ulemas got angry on Dhirendra Shastri's statement

सहारनपुर : श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर चित्रगुप्त पीठ की ओर से 6 दिसंबर को कारसेवा के ऐलान के बाद धार्मिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रस्तावित कारसेवा की अनुमति देने की मांग की है। संतों का कहना है कि वे श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण चाहते हैं और इसके लिए अगले महीने जन्मभूमि की ओर कूच करेंगे।संतों के इस ऐलान के बाद देवबंदी उलेमाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मामले का संज्ञान लेने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

संतों ने किया आंदोलन का ऐलान

कार्यक्रम के दौरान स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि संत श्रीकृष्ण की जन्मभूमि को लेकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण कराना है। कार्यक्रम में मौजूद संतों ने ‘कृष्ण लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’ जैसे नारे भी लगाए। संतों की ओर से यह भी कहा गया कि राम जन्मभूमि के बाद अब काशी और मथुरा की बारी है। संतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही और जरूरत पड़ने पर इसके लिए बलिदान देने की बात भी कही।

6 दिसंबर को कारसेवा की घोषणा

चित्रगुप्त पीठ की ओर से 6 दिसंबर को कारसेवा का ऐलान किए जाने के बाद इस मामले ने और अधिक ध्यान आकर्षित किया है। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कारसेवा की अनुमति देने की मांग की है। संत पक्ष की ओर से कहा गया है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर उनकी मांग लंबे समय से चली आ रही है और वे भव्य मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन करेंगे। अब इस ऐलान के बाद प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की चुनौती भी महत्वपूर्ण हो गई है।

देवबंदी उलेमाओं ने जताई चिंता

संतों के ऐलान पर देवबंदी उलेमाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने चिंता जताई है। मौलाना साजिद रशीदी ने 6 दिसंबर को प्रस्तावित कारसेवा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मथुरा और काशी को लेकर कारसेवा की बात करना संवेदनशील विषय है। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी इसी तरह की शब्दावली का इस्तेमाल किया गया था। मौलाना रशीदी ने शासन-प्रशासन से अपील की कि मामले को गंभीरता से लिया जाए और किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित न होने दी जाए।

कानून और संविधान के दायरे में समाधान की मांग

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों का समाधान कानून और संविधान के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में संसद द्वारा बनाए गए कानून का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। रशीदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने अयोध्या के बाद अन्य मस्जिदों के नीचे मंदिर तलाशने की प्रवृत्ति से बचने की बात कही थी।

प्रशासन की भूमिका पर निगाहें

श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर संतों के कारसेवा के ऐलान और मुस्लिम धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया के बाद अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ संत पक्ष श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी की बात कर रहा है, वहीं मुस्लिम धर्मगुरु कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। 6 दिसंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अब प्रशासन किस तरह की रणनीति अपनाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे के बीच कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द कायम रखा जाए।

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