मुजफ्फरनगर : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के फुगाना थाना क्षेत्र के हबीबपुर सीकरी गांव में रविवार देर रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गम में डुबो दिया। लगातार हो रही बारिश के बीच एक कच्चा मकान भरभराकर ढह गया, जिसके मलबे में एक ही परिवार के सात लोग दब गए। इस हादसे में मजदूर इस्लाम कस्सार और उसके चार मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि दो बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और हर किसी की आंखें नम हैं।

जानकारी के अनुसार, 58 वर्षीय इस्लाम कस्सार मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। रविवार रात वह अपने छह बच्चों—रुकैया (8), रुखसार (10), अलसीबा (4), सुमैया (7), आहद (5) और एक वर्षीय जीशान—के साथ घर में बैठकर खाना खा रहा था। इसी दौरान लगातार हो रही बारिश के कारण पहले मकान की एक दीवार भरभराकर गिर गई। इससे पहले कि परिवार के सदस्य कुछ समझ पाते, पूरी छत उनके ऊपर आ गिरी और सभी मलबे में दब गए।
हादसे के बाद पूरे मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई। तेज आवाज सुनकर पड़ोसी और आसपास के ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि पूरा परिवार मलबे में दब चुका है। ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू किया। जेसीबी मशीन मंगाई गई और सैकड़ों ग्रामीणों ने मिलकर मलबा हटाना शुरू किया। लगभग आधे घंटे की मशक्कत के बाद सभी लोगों को बाहर निकाला गया।
घायलों को तत्काल निजी वाहनों और एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने इस्लाम, उसकी 10 वर्षीय बेटी रुखसार, पांच वर्षीय बेटे आहद, चार वर्षीय अलसीबा और एक वर्षीय जीशान को मृत घोषित कर दिया। वहीं आठ वर्षीय रुकैया और सात वर्षीय सुमैया गंभीर रूप से घायल मिलीं। दोनों बच्चियों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
गांव के प्रधान प्रमोद कुमार ने बताया कि गांव के कई मजदूर परिवार आर्थिक तंगी के कारण आज भी कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। अधिकांश मकानों का पिछला हिस्सा पक्का है, जबकि सामने का हिस्सा कच्चा बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश से कच्ची दीवार कमजोर हो गई थी, जिसके गिरने से पूरी छत भी ढह गई और इतना बड़ा हादसा हो गया।
हादसे के दौरान एक संयोग ने परिवार के तीन सदस्यों की जान बचा ली। इस्लाम की पत्नी जैबून किसी काम से मोहल्ले में गई हुई थीं। उनके साथ 14 वर्षीय बेटी शहजादी और बेटा शुभान भी घर से बाहर थे। इसी वजह से वे इस हादसे की चपेट में आने से बच गए। परिवार में कुल 10 सदस्य थे, जिनमें अब पांच लोगों की मौत हो चुकी है, दो बच्चे घायल हैं और तीन सदस्य सुरक्षित हैं। अपनों को खोने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि सक्रिय हो गए। कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल देर रात जिला अस्पताल पहुंचे और घायल बच्चियों का हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए तथा पीड़ित परिवार को हरसंभव सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया।
वहीं, मंडलायुक्त डॉ. रुपेश कुमार ने घटनास्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने, घायलों को समुचित उपचार उपलब्ध कराने और पीड़ित परिवार को हरसंभव आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने भी प्रभावित परिवार को शासन की ओर से मिलने वाली सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ग्रामीणों ने बताया कि तेज बारिश के दौरान अचानक जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। पहले किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ है, लेकिन जब चीख-पुकार सुनाई दी तो लोग मौके की ओर दौड़े। ग्रामीण मुजस्सिर ने बताया कि सैकड़ों लोगों ने मिलकर मलबा हटाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। एक-एक कर जब मासूम बच्चों और उनके पिता को मलबे से बाहर निकाला गया तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।
यह हादसा एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर और कच्चे मकानों की समस्या को उजागर करता है। लगातार बारिश के मौसम में ऐसे मकान कभी भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। फिलहाल पूरा हबीबपुर सीकरी गांव शोक में डूबा हुआ है और हर कोई इस दुखद घटना से स्तब्ध है।

