VHP प्रेसिडेंट के ‘मंदिर वापस करो’ वाले बयान पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने एतराज़ जताया, मौलाना राशिद सिद्दीकी ने उठाए सवाल

Ulemas got angry on Dhirendra Shastri's statement

सहारनपुर : विश्व हिंदू परिषद (VHP) के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट आलोक कुमार के मंदिर मैनेजमेंट को लेकर दिए गए बयान ने इस मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है। कुमार ने कहा कि भविष्य में VHP अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सरकारों से मांग करेगी कि हिंदू मंदिरों का कंट्रोल हिंदू समुदाय को वापस दिया जाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी बड़े आंदोलन की ज़रूरत पड़ी, तो संगठन उससे पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने गोरक्षा कानूनों को मज़बूत करने की भी मांग की और मंदिरों की आज़ादी के लिए संघर्ष जारी रखने का वादा किया।

VHP प्रेसिडेंट आलोक कुमार के इस बयान पर कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मौलाना साजिद सिद्दीकी ने बयान पर एतराज़ जताते हुए कहा कि अगर VHP सभी मंदिरों को वापस लेने की बात कर रही है, तो यह मोहन भागवत के उस पब्लिक बयान से अलग लगता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर खोजने की ज़रूरत नहीं है। मौलाना साजिद सिद्दीकी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या VHP 1991 में पार्लियामेंट से पास हुए पूजा की जगहों (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट का अपमान करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से देश में मंदिर-मस्जिद के झगड़े फिर से भड़क सकते हैं और सामाजिक मेलजोल पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि देश महंगाई, बेरोज़गारी, कानून-व्यवस्था और दूसरी आम लोगों की चिंताओं से जुड़े कई ज़रूरी मुद्दों का सामना कर रहा है, जिन पर और ज़्यादा चर्चा और कोशिश की ज़रूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार धार्मिक विवाद उठाने से समाज में तनाव बढ़ सकता है, जबकि जनता की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देना ज़्यादा ज़रूरी है। फिलहाल, VHP और मुस्लिम धार्मिक नेताओं के बयानों के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं। सरकार की तरफ से अभी तक कोई ऑफिशियल जवाब नहीं आया है। ऐसे सेंसिटिव विषयों पर आगे की पॉलिटिकल और सोशल प्रतिक्रियाओं पर करीब से नज़र रखी जा रही है।

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