चंडीगढ़ : पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पंजाब में एक बार फिर अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि, दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद अभी तक अकाली दल या बीजेपी की ओर से गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसके बावजूद राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
किसान आंदोलन के बाद अलग हुए थे दोनों दल
अकाली दल और बीजेपी लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन के सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों ने कई चुनाव साथ मिलकर लड़े। लेकिन वर्ष 2020 में कृषि कानूनों को लेकर शुरू हुए किसान आंदोलन के दौरान दोनों पार्टियों के रिश्तों में बड़ा बदलाव आया।
शिरोमणि अकाली दल ने कृषि कानूनों के मुद्दे पर बीजेपी से दूरी बनाते हुए एनडीए से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरीं। अब प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात ने पुराने गठबंधन की संभावित वापसी की अटकलों को फिर हवा दे दी है।
सुखबीर बादल ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि उन्होंने पंजाब की कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री से चर्चा की। इसके अलावा राज्य में चल रही सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया गया। उन्होंने गठबंधन को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। ऐसे में फिलहाल दोनों दलों के बीच राजनीतिक बातचीत को लेकर ही कयास लगाए जा रहे हैं।
केजरीवाल ने साधा निशाना
मुलाकात के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अकाली दल और बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने दोनों दलों के संभावित गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए इसे लेकर राजनीतिक तंज कसा। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है और अकाली दल तथा बीजेपी दोनों ही अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरते रहे हैं। ऐसे में यदि दोनों दल फिर एक साथ आते हैं तो यह AAP के लिए चुनावी चुनौती बढ़ा सकता है।
अब गठबंधन पर नजर
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने की संभावना है। हालांकि गठबंधन की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में अकाली दल और बीजेपी के बीच कोई औपचारिक बातचीत या गठबंधन का ऐलान होता है या नहीं। फिलहाल इतना जरूर है कि पंजाब चुनाव से पहले सियासी खिचड़ी पकने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

