मंडी में बारिश से आफत: खुले में भीगा धान, किसानों और व्यापारियों ने मंडी के खराब इंतज़ाम पर सवाल उठाए

Rain wreaks havoc in the market, Paddy soaks in the open, Farmers and traders question the poor arrangements at the market.

सहारनपुर : नई धान की फसल आने के साथ ही सहारनपुर की गंगोह एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मंडी में बारिश ने किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। मंडी परिसर में सही टिन शेड, सुरक्षित स्टोरेज और ड्रेनेज सिस्टम न होने की वजह से खुले में रखा बड़ी मात्रा में धान बारिश में भीग गया। इससे किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर मार्केट कमेटी की तैयारियों और इंतज़ामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Rain wreaks havoc in the market, Paddy soaks in the open, Farmers and traders question the poor arrangements at the market.

बारिश शुरू होते ही मंडी परिसर के कई हिस्सों में पानी भर गया। खुले में रखे धान के बोरे बारिश से भीग गए। किसानों ने अपनी फसल को बचाने के लिए तिरपाल और दूसरे कामचलाऊ इंतज़ाम किए, लेकिन भारी बारिश की वजह से उनकी कोशिशें बेकार गईं। कई किसानों ने बताया कि धान की फसल उगाने में महीनों की मेहनत लगती है, लेकिन मंडी की लापरवाही की वजह से कुछ मिनट की बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। किसानों का कहना है कि वे सालों से मंडी में सही टिन शेड और कंक्रीट के प्लेटफॉर्म की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हर साल बारिश के मौसम में यह स्थिति बनती है, और किसानों को अपनी उपज का नुकसान होता है। उनका कहना है कि अगर मंडी परिसर में सही शेड और बेहतर ड्रेनेज होता, तो धान को सुरक्षित रखा जा सकता था।

व्यापारियों ने भी मार्केट कमेटी के काम करने के तरीके पर नाराजगी जताई। व्यापारी संदीप कुमार, प्रदीप सैनी, रामनिवास और योगेश ने कहा कि मार्केट कमेटी किसानों और व्यापारियों से रेगुलर मार्केट फीस तो लेती है, लेकिन बेसिक सुविधाएं देने में पूरी तरह फेल रही है। उनका कहना है कि बारिश से धान की क्वालिटी पर असर पड़ता है। नमी बढ़ने से खरीदार कम दाम देते हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान होता है।

व्यापारियों का कहना है कि धान खरीदते समय क्वालिटी सबसे ज़रूरी है। धान में ज़्यादा नमी होने पर उसे सुखाने में ज़्यादा समय और खर्च लगता है। खरीदार अक्सर ऐसा धान खरीदने से मना कर देते हैं। इससे किसानों की उपज लंबे समय तक मंडी में पड़ी रहती है, और उनके पेमेंट में देरी होती है। स्थानीय किसानों ने बताया कि मंडी में पानी भरने की समस्या कोई नई बात नहीं है। हल्की बारिश होते ही कई जगहों पर पानी जमा हो जाता है, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली और दूसरी गाड़ियों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है। किसानों का कहना है कि ड्रेनेज का सही सिस्टम न होने की वजह से हर साल यह स्थिति बनती है, लेकिन इस समस्या का कोई पक्का हल निकालने की कोशिश नहीं की जाती।

किसानों और व्यापारियों ने मिलकर मार्केट कमेटी से मांग की है कि मार्केट परिसर में सही टिन शेड बनाए जाएं, सुरक्षित स्टोरेज की सुविधा दी जाए, कंक्रीट के प्लेटफॉर्म बनाए जाएं और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि अगर इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो हर मानसून में किसानों की मेहनत और उनकी फसल बर्बाद होती रहेगी।

बारिश में भीगे धान की यह तस्वीर सिर्फ एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि यह मार्केट की लंबे समय से चली आ रही अव्यवस्था की कहानी है। किसानों का कहना है कि सरकार खेती को बढ़ावा देने और किसानों की इनकम बढ़ाने की बात करती है, लेकिन अगर उनकी उपज मार्केट में सुरक्षित नहीं रहेगी तो इन कोशिशों का पूरा फायदा किसानों तक नहीं पहुंच पाएगा। अब सबकी निगाहें मार्केट कमेटी और संबंधित अधिकारियों पर हैं कि वे किसानों की इस जायज मांग पर कब एक्शन लेते हैं। मंडी समिति सचिव सोहनवीर सिंह का कहना है कि मार्केट कॉम्प्लेक्स काफी बड़ा है। इसके बावजूद कई जगहों पर टिन शेड बनाए गए हैं, लेकिन धान और गेहूं के सीजन में अनाज की आवक बढ़ जाती है, जिससे किसानों की फसल बारिश में भीगने की संभावना ज्यादा रहती है। सरकार को लेटर लिखकर और टिन शेड बनाने की मांग की गई है।

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