सावन स्पेशल: सहारनपुर के मराठाकालीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब, पहले सोमवार को हुआ जलाभिषेक

मराठाकालीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब

सहारनपुर : सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही पूरा उत्तर भारत भोलेनाथ की भक्ति में रंग गया है। हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे कांवड़ियों से लेकर शहरों और गांवों के शिव मंदिरों तक हर तरफ हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं। सावन के पहले सोमवार को सहारनपुर के ऐतिहासिक और मराठाकालीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में भी शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।

मराठाकालीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब

सहारनपुर में वैसे तो भगवान शिव के सैकड़ों छोटे-बड़े मंदिर हैं, लेकिन भूतेश्वर महादेव मंदिर की अपनी अलग पहचान है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी बताया जाता है। मान्यता है कि मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू और प्राकृतिक है। यही वजह है कि सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

सावन के पहले सोमवार पर उमड़ी भीड़

सावन के पहले सोमवार को सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। भक्तों ने कतार में लगकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए और शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किए। मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंजता रहा।

कांवड़ यात्रा के चलते भी इस पूरे क्षेत्र में शिवभक्ति का माहौल बना हुआ है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले कांवड़िये भी भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए विभिन्न शिवालयों में पहुंचते हैं। ऐसे में सावन के दौरान भूतेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है।

मराठाकालीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब

मराठा काल से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भूतेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करीब 500 वर्ष पहले मराठा शासनकाल में कराया गया था। बताया जाता है कि उस दौर में मराठा शासक भगवान शिव के बड़े भक्त थे। इसी कारण सहारनपुर क्षेत्र में चार प्रमुख शिवालयों की स्थापना कराई गई थी। इनमें भूतेश्वर महादेव, पातालेश्वर महादेव, बागेश्वर महादेव और पाठेश्वर महादेव मंदिरों का उल्लेख किया जाता है।

इन मंदिरों में भूतेश्वर महादेव को प्रमुख शिवालय के रूप में माना जाता है। यहां सावन और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर विशेष आयोजन होते हैं और दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

40 दिन जलाभिषेक की मान्यता

भूतेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी एक धार्मिक मान्यता यह भी है कि जो श्रद्धालु लगातार 40 दिनों तक भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके बिगड़े काम बन जाते हैं। इसी आस्था के चलते कई भक्त नियमित रूप से मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।

मराठाकालीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब

मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह भी मान्यता है कि मराठा शासकों ने शिव मंदिरों के आसपास बेलपत्र के पेड़ लगवाए थे, ताकि भक्तों को भगवान शिव की पूजा के लिए बेलपत्र आसानी से मिल सके।

मंदिर की वास्तुकला भी आकर्षण का केंद्र

भूतेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। मंदिर परिसर में मौजूद छत्रियां और अन्य संरचनाएं मराठा काल की स्थापत्य परंपरा की झलक दिखाती हैं। मंदिर में स्थापित शिवलिंग के ऊपर मौजूद छत्र को भी मराठा काल की धरोहर बताया जाता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर परिसर में संतों की कई समाधियां भी मौजूद हैं। बताया जाता है कि यहां करीब 20 संतों की समाधियां हैं, जहां अलग-अलग समय में साधु-संतों ने समाधि ली थी। श्रद्धालु इन समाधियों के भी दर्शन करते हैं और उन्हें आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र मानते हैं।

सावन के पहले सोमवार को मंदिर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सहारनपुर का भूतेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ है। सावन के पूरे महीने यहां भक्तों का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है और हर ओर हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया News 14 Today के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...

Related posts