सहारनपुर : अगर किसी व्यक्ति को उसके करीब चार करोड़ रुपये के मकान पर 22 करोड़ रुपये से ज्यादा का हाउस टैक्स और करोड़ों रुपये का जलकर भरने का नोटिस मिले, तो उसकी हैरानी का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। सहारनपुर नगर निगम क्षेत्र में सामने आए एक ऐसे ही मामले ने नगर निगम की कर निर्धारण व्यवस्था और जीआईएस सर्वे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला स्मार्ट सिटी सहारनपुर के वार्ड नंबर-2 स्थित रामनगर और मल्हीपुर रोड का बताया जा रहा है। यहां रहने वाले फरहाद आलम गाड़ा को नगर निगम की ओर से जीआईएस सर्वे के आधार पर हाउस टैक्स का नोटिस जारी किया गया है। परिवार का दावा है कि नोटिस में करीब 22 करोड़ रुपये से अधिक का गृहकर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा करोड़ों रुपये का जलकर भी बकाया बताया गया है।
नोटिस सामने आने के बाद परिवार के लोग हैरान हैं। फरहाद गाड़ा के मुताबिक, उनका मकान करीब 816 गज में बना हुआ है और इसकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग चार करोड़ रुपये के आसपास है। उनका कहना है कि मकान की कुल कीमत से कई गुना अधिक टैक्स का नोटिस मिलना समझ से परे है।

फरहाद के अनुसार, मकान का निर्माण करीब दो साल पहले हुआ था और वर्ष 2025 में उनका परिवार यहां रहने आया। उन्होंने कहा कि नोटिस मिलने के बाद पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है और उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर इतनी बड़ी राशि किस आधार पर निर्धारित की गई।
जलकर को लेकर भी उठाए सवाल
फरहाद गाड़ा ने नगर निगम के जलकर निर्धारण पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि उनके घर तक अभी तक नगर निगम की पानी की लाइन नहीं पहुंची है। जिस पानी की टंकी से क्षेत्र में जलापूर्ति होनी है, वह भी अभी शुरू नहीं हुई है। इसके बावजूद नोटिस में करोड़ों रुपये का जलकर जोड़ दिया गया। परिवार का सवाल है कि जब घर में नगर निगम की जलापूर्ति ही उपलब्ध नहीं है तो इतनी बड़ी राशि का जलकर किस आधार पर निर्धारित किया गया?
फरहाद का कहना है कि नगर निगम ने जीआईएस तकनीक के जरिए सर्वे कराया था, ताकि संपत्तियों का सही मूल्यांकन और पारदर्शी तरीके से कर निर्धारण किया जा सके। लेकिन यदि इसी सर्वे के आधार पर इतनी बड़ी विसंगति सामने आ रही है, तो जीआईएस सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
‘अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे’
फरहाद गाड़ा ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले को लेकर अपने अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह ली है। अब परिवार इस नोटिस को न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। उनका कहना है कि इस मामले में यह भी जांच होनी चाहिए कि नोटिस किस आधार पर तैयार हुआ और इतनी बड़ी राशि कैसे निर्धारित की गई। उन्होंने जीआईएस सर्वे करने वाली एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
फरहाद ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में सड़क, नाली, सफाई और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एक तरफ मूलभूत सुविधाओं की कमी और दूसरी तरफ करोड़ों रुपये के टैक्स नोटिस लोगों के लिए चिंता का विषय हैं।
नगर आयुक्त ने बताया टाइपिंग मिस्टेक
मामले को लेकर नगर आयुक्त शीपु गिरी से बात करने की कोशिश की गई। नगर आयुक्त की ओर से इसे टाइपिंग मिस्टेक बताया गया। उन्होंने कहा कि यदि हाउस टैक्स का नोटिस जारी करने में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, परिवार का कहना है कि इतनी बड़ी राशि का नोटिस केवल टाइपिंग की गलती बताकर खत्म नहीं किया जा सकता। उनका सवाल है कि आखिर जीआईएस सर्वे से लेकर नोटिस जारी होने तक किसी स्तर पर इस विसंगति की जांच क्यों नहीं हुई।
यह पहला मामला नहीं है जब सहारनपुर नगर निगम की कर निर्धारण व्यवस्था पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई संपत्ति मालिक जीआईएस सर्वे के आधार पर जारी हाउस टैक्स और जलकर में गड़बड़ी की शिकायत कर चुके हैं। अब फरहाद गाड़ा का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर नगर निगम की कर व्यवस्था और जीआईएस सर्वे की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। परिवार का कहना है कि वह अब इस मामले को न्यायालय में ले जाएगा। वहीं नगर निगम की ओर से इसे गलती बताया गया है। अब देखना होगा कि इस मामले की जांच में इतनी बड़ी राशि निर्धारित होने की असली वजह क्या सामने आती है और क्या नगर निगम इस नोटिस को संशोधित कर परिवार को राहत देता है।

