हल्द्वानी : हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को अपमानित करने के उद्देश्य से शुद्धिकरण कराए जाने का आरोप साबित करने के लिए कांग्रेस के पास कोई ठोस तथ्य या प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग देकर समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह बयान उस समय दिया है, जब शुद्धिकरण मामले में एक दिन पहले ही हल्द्वानी कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कांग्रेस कार्यकर्ता अंजू की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 299 के साथ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(R) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने एसपी क्राइम जगदीश चंद्र को सौंपी है।
सीएम धामी ने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि उसके पास मामले में किसी व्यक्ति के अपमान या जातिगत भेदभाव से जुड़े प्रमाण हैं तो उन्हें सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए संवेदनशील मुद्दों को हवा देने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी निभाने की अपील भी कांग्रेस से की।
दरअसल, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुद्धिकरण यज्ञ कराए जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को सामाजिक और जातिगत अपमान से जोड़ते हुए विरोध जताया। वहीं, भाजपा और सरकार की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है। नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी के मुताबिक, इस प्रकरण को लेकर पूरे उत्तराखंड से करीब 80 शिकायतें और याचिकाएं पुलिस को मिली थीं। इनमें नैनीताल जिले की 19 शिकायतें शामिल थीं। कानूनी परीक्षण के बाद अंजू की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस अब मामले से जुड़े वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, शिकायतों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। इसके अलावा शुद्धिकरण यज्ञ के आयोजन में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।
एफआईआर के बाद मुख्यमंत्री धामी का बयान आने से विवाद को लेकर सियासी बहस और तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस मामले को सामाजिक सम्मान और अधिकारों से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री ने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण मांगते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। अब पुलिस जांच और उसके निष्कर्षों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

