लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का ऐलान कर दिया है। इससे पहले तीन सितंबर 2026 को आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था। अब मायावती ने स्पष्ट किया है कि आकाश आनंद यदि पार्टी में स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वह स्वतंत्र हैं। यानी उन्हें बसपा से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है।
मायावती का यह बयान उनके समधी अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के ऐलान के बाद सामने आया है। अशोक सिद्धार्थ के फैसले पर मायावती ने इसे ‘देर आए, दुरुस्त आए’ बताया। हालांकि, इसी के साथ उन्होंने अशोक सिद्धार्थ की नीयत और राजनीतिक अभिलाषा को लेकर भी सवाल उठाए। मायावती ने कहा कि यदि अशोक सिद्धार्थ ने पहले ही राजनीति से संन्यास ले लिया होता तो बसपा, बहुजन समाज और बहुजन मूवमेंट के हित में उन्हें कई बार कड़े फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
अशोक सिद्धार्थ को लेकर मायावती का सख्त रुख
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि पार्टी की अंबेडकरवादी राजनीति त्याग, तपस्या, संघर्ष और कुर्बानी पर आधारित रही है। इसमें निजी और पारिवारिक स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। मायावती के मुताबिक, यदि अशोक सिद्धार्थ ने समय रहते राजनीति से दूरी बना ली होती तो विधानसभा चुनाव, खासकर उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाने की तैयारियों के बीच पार्टी और मूवमेंट के व्यापक हित में उन्हें उनके खिलाफ कड़े कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ती।
मायावती ने यह भी कहा कि पार्टी के सभी लोगों को बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम के आदर्शों से सीख लेनी चाहिए। कार्यकर्ताओं और नेताओं को निजी हित, पारिवारिक मोह और पद की लालसा से ऊपर उठकर संगठन और बहुजन आंदोलन के हित में काम करना चाहिए।
आकाश आनंद के रवैये पर उठाए सवाल
मायावती ने आकाश आनंद के रवैये पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अशोक सिद्धार्थ से संबंधित एक पोस्ट साझा की थी, जिसे आकाश आनंद ने रिपोस्ट नहीं किया। मायावती का कहना है कि वह पोस्ट आकाश आनंद के सकारात्मक और भलाई के लिए थी।
उन्होंने कहा कि इससे पहले आकाश आनंद उनके एक्स पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में इस बार उनके पोस्ट को रिपोस्ट नहीं करने से उनके रवैये को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। मायावती ने आरोप लगाया कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद दोनों के लिए पार्टी और बहुजन मूवमेंट की सफलता की तुलना में निजी और पारिवारिक स्वार्थ का मोह अधिक है।
मायावती ने कहा कि यदि आकाश आनंद को पार्टी और मूवमेंट के वास्तविक हित तथा अपने राजनीतिक करियर से ज्यादा रिश्ते-नातों का मोह है तो उनके ‘डबल माइंड’ होकर काम करने का सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में वह बसपा और बहुजन आंदोलन का भला कैसे कर सकते हैं।
आकाश आनंद को पूरी तरह मुक्त करने के फैसले के साथ मायावती ने बसपा कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी में जुटने का संदेश भी दिया। उन्होंने विरोधियों के साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का डटकर मुकाबला करने की अपील की।
मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में फिर से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना पार्टी का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूरी ताकत के साथ चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि पार्टी की प्राथमिकता ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति के साथ मजबूत कानून-व्यवस्था और बेहतर विकास वाली सरकार बनाना है। यही लक्ष्य पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए सर्वोपरि होना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बसपा के भीतर नेतृत्व, पारिवारिक रिश्तों और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर मायावती ने अपना रुख बेहद स्पष्ट और सख्त कर दिया है। आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त करने का फैसला बसपा की आगे की रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

