बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली में बहुजन समाज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। बसपा के वरिष्ठ नेता शरीफ अली अल्वी ने सोमवार को अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का दामन थाम लिया। सिविल लाइंस स्थित एक होटल में आयोजित पार्टी और भीम आर्मी की बैठक के दौरान उन्हें संगठन की प्राथमिक सदस्यता दिलाई गई। शरीफ अली अल्वी के पार्टी बदलने के बाद बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र की सियासत में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आजाद समाज पार्टी के नेताओं ने बड़ी संख्या में समर्थकों के जुड़ने को संगठन के लिए महत्वपूर्ण बताया।
संघर्षशील राजनीति से प्रभावित होकर लिया फैसला
आजाद समाज पार्टी में शामिल होने के बाद शरीफ अली अल्वी ने कहा कि समाज के दबे-कुचले, शोषित और वंचित वर्गों के साथ-साथ अल्पसंख्यकों के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए पार्टी लगातार संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद और भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह की संघर्षशील राजनीति से प्रभावित होकर उन्होंने अपने साथियों के साथ पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया है। अल्वी ने कहा कि वह आने वाले समय में जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ उठाने के लिए संगठन के साथ मिलकर काम करेंगे।
भाजपा सरकार पर साधा निशाना
बैठक के दौरान पार्टी नेताओं ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है और महंगाई के कारण आम जनता परेशान है। कानून-व्यवस्था और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा गया। नेताओं ने कहा कि आजाद समाज पार्टी आने वाले समय में संगठन का विस्तार करेगी और जनता की समस्याओं को लेकर सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठाएगी।
बरेली की सियासत में नए समीकरण
शरीफ अली अल्वी के साथ बड़ी संख्या में समर्थकों के आजाद समाज पार्टी में आने से बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। पार्टी नेताओं का दावा है कि इस नए जुड़ाव से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। बैठक में आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के मंडल एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों के अलावा अजय प्रधान, अमर सिंह, अच्छन अंसारी, मनोज सागर और अतुल वाल्मीकि समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शरीफ अली अल्वी के साथ आए समर्थकों का स्थानीय राजनीति में कितना प्रभाव पड़ता है और इसका असर बरेली शहर विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों पर किस रूप में दिखाई देता है।

