देहरादून : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में गुरुवार को सरकारी सिस्टम की सक्रियता को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने आम और खास के बीच प्रशासनिक तंत्र की तत्परता पर सवाल खड़े कर दिए। कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के सरकारी आवास की दीवार को ड्रेनेज में अतिक्रमण और जलभराव से नुकसान की आशंका के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। एडीएम से लेकर एसडीएम, तहसीलदार और अन्य विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ड्रेनेज की समस्या का कारण तलाशने में जुट गए।
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मामला कैंट रोड स्थित कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के सरकारी आवास का है। बताया गया कि ड्रेनेज की समस्या के कारण सीवर का पानी उनके आवास के लॉन में भर गया था। इससे दीवार को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई। समस्या की जानकारी मिलते ही संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का निरीक्षण शुरू किया।
मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने कई जगह ड्रेनेज के ढक्कन खुलवाकर पानी की निकासी व्यवस्था देखी। यह पता लगाने की कोशिश की गई कि आखिर पानी की निकासी कहां बाधित है और गंदा पानी मंत्री के आवास तक कैसे पहुंचा। ड्रेनेज सिस्टम में अतिक्रमण की आशंका को लेकर भी जांच की गई।
मंत्री के घर के बाहर जुटे कई विभागों के अधिकारी
एडीएम प्रशासन स्मिता परमार की अगुवाई में एसडीएम, तहसीलदार समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की मौजूदगी में मंत्री के आवास की दीवार की मरम्मत का काम भी शुरू कराया गया। प्रशासनिक अमले की यह तेजी आसपास के लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।
दरअसल, देहरादून शहर में ड्रेनेज जाम, जलभराव और अतिक्रमण की समस्याएं नई नहीं हैं। बारिश के दौरान कई इलाकों में पानी भरने की शिकायतें सामने आती हैं। आम नागरिकों को नाली सफाई, जलभराव और अतिक्रमण जैसी समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में मंत्री के आवास से जुड़ी समस्या सामने आते ही अधिकारियों का मौके पर पहुंचना सवाल खड़े कर रहा है।
आम आदमी पूछ रहा- हमारे घर पर कब पहुंचेगा सिस्टम?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि सरकारी तंत्र की ऐसी तत्परता आम लोगों की शिकायतों पर कब दिखाई देगी। शहर में कहीं नाली बंद है तो कहीं बारिश का पानी घरों और दुकानों में घुस जाता है। कई जगह लोग लंबे समय से जलनिकासी की समस्या झेल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर किसी आम नागरिक के घर की दीवार को नाले के पानी से खतरा पैदा हो जाए, तो क्या प्रशासन इसी गति से कार्रवाई करेगा?
मंत्री गणेश जोशी के मुताबिक उन्होंने अधिकारियों को समस्या की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि ड्रेनेज की वजह से पूरे लॉन में सीवर का पानी भर गया था। इसके बाद नगर निगम के करीब 40 कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे। अब अधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं और मामले की पूरी जानकारी ले रहे हैं।
कैंट रोड पर प्रशासन की नजर
गणेश जोशी का सरकारी आवास कैंट रोड पर है। इसके बगल में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का सरकारी आवास भी मौजूद है। यही सड़क मुख्यमंत्री और राज्यपाल के आवास की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों में शामिल है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह इलाका महत्वपूर्ण है।
ड्रेनेज में अतिक्रमण किस स्तर पर हुआ और पानी की निकासी बाधित होने की वास्तविक वजह क्या है, इसकी जांच की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर स्थिति का निरीक्षण किया है।
वहीं, इस मामले में एडीएम प्रशासन स्मिता परमार से जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। फिलहाल प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।
मंत्री के आवास की एक दीवार और ड्रेनेज की समस्या से शुरू हुआ यह मामला अब सरकारी सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल बन गया है। आम आदमी की छोटी समस्या के समाधान में जहां कई दिन और कई दफ्तर लग जाते हैं, वहीं खास लोगों की परेशानी पर पूरा सिस्टम कितनी तेजी से सक्रिय हो जाता है—देहरादून की यह तस्वीर इसी फर्क को सामने रखती है।

