देहरादून : उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी ने चंपावत में आयोजित सावन उत्सव कार्यक्रम में सरकार के कामकाज का जिक्र करते हुए लैंड जिहाद, लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दे उठाए।
सेवा संकल्प फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं को संबोधित करते हुए गीता धामी ने कहा कि समाज में कानून और नियमों का होना जरूरी है। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) का जिक्र करते हुए दावा किया कि इससे बेटियों को समान अधिकार देने की दिशा में काम हुआ है।
गीता धामी ने प्रदेश में चल रहे सत्यापन अभियान और सरकारी जमीनों से कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायतें सामने आई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्यापन अभियान में ऐसे लोग भी सामने आ रहे हैं, जिनकी पहचान और दस्तावेजों को लेकर सवाल हैं। गीता धामी ने दावा किया कि कुछ लोग पहचान छिपाकर प्रदेश में रह रहे हैं और अलग-अलग व्यवसायों से जुड़े हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण का मुद्दा उठाया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित मामलों की आधिकारिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकती है।
गीता धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रदेश की जनता और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और बेहतर उत्तराखंड बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रदेश में कानून का पालन सुनिश्चित हो। अपने संबोधन में उन्होंने धर्मांतरण कानून और मदरसों से जुड़े सरकार के फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। चंपावत में गीता धामी के इस संबोधन ने भी राज्य की सियासत में नए राजनीतिक विमर्श को हवा दे दी है।

