नई दिल्ली : पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। सभी राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की रणनीति बना रहे हैं। इस बीच कांग्रेस ने भी सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को चुनौती देने के लिए कमर कस ली है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जल्द ही पंजाब का दौरा कर सकते हैं। इस दौरे के साथ ही कांग्रेस के व्यापक चुनावी अभियान की शुरुआत होने की संभावना है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी का पंजाब दौरा पहले अक्टूबर के अंत में प्रस्तावित था, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने के लिए 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली INDIA गठबंधन की रैली के कारण कार्यक्रम में बदलाव किया गया। कांग्रेस अब नवंबर के पहले सप्ताह में राहुल गांधी की यात्रा की रूपरेखा तैयार कर रही है। पार्टी का उद्देश्य राज्य सरकार को प्रमुख जनहित के मुद्दों पर घेरना और चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करना है।
नशा और कानून-व्यवस्था होंगे कांग्रेस के प्रमुख मुद्दे
कांग्रेस के प्रस्तावित चुनावी अभियान में पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रमुख मुद्दे होंगे। इसके अलावा किसानों की परेशानियों, युवाओं के लिए रोजगार और राज्य में बढ़ती सामाजिक चुनौतियों को भी चुनावी बहस का हिस्सा बनाया जा सकता है। पार्टी का आरोप है कि इन मुद्दों पर राज्य सरकार अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है। हालांकि, इन आरोपों पर आम आदमी पार्टी का पक्ष भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहेगा।
पंजाब में कांग्रेस की AICC प्रभारी सचिव हिना कावरे ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि राज्य से मिल रहा फीडबैक सकारात्मक है और पार्टी की टीम एकजुट होकर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं और जल्द पंजाब का दौरा कर सकते हैं। उनके मुताबिक, नवंबर का पहला सप्ताह दौरे के लिए उपयुक्त हो सकता है और इसकी तैयारियां की जा रही हैं।
कांग्रेस ने पंजाब में संगठनात्मक बदलाव के बाद चुनावी तैयारियों को गति दी है। परगट सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि संगठन में एकजुटता बढ़ेगी। उन्होंने अमरिंदर राजा वडिंग की जगह ली है। पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन से जुड़े मतभेदों को दूर करने की कोशिशों के बाद अब ध्यान चुनावी रणनीति और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने पर है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल 26 अक्टूबर को पंजाब का दौरा करेंगे। इस दौरान वे वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें कर राहुल गांधी की प्रस्तावित यात्रा और आगामी चुनाव प्रचार की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। वे राज्य राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक की अध्यक्षता भी करेंगे। इसमें उन मुद्दों पर चर्चा होगी, जिन्हें राहुल गांधी अपने दौरे के दौरान उठा सकते हैं। फरवरी-मार्च 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले व्यापक प्रचार अभियान की रूपरेखा तैयार करना भी इन बैठकों का उद्देश्य है।
इससे पहले चुनाव अभियान समिति के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने 22 अक्टूबर को परगट सिंह और अन्य नेताओं के साथ संभावित चुनावी कार्यक्रमों की समीक्षा की थी। वहीं, राज्य के लिए AICC प्रभारी सचिन पायलट ने अक्टूबर में पांच दिवसीय कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेताओं के साथ बैठकें कीं। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने उन परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने कथित तौर पर गैंगस्टर हिंसा या नशे की समस्या के कारण अपने परिजनों को खोया है।
हिंसा की घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना
कांग्रेस नेता रवींद्र दलवी ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था चुनाव प्रचार के केंद्र में रहेंगे। पार्टी इन मुद्दों के जरिए राज्य सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है। उन्होंने जगराओं में कबड्डी खिलाड़ी तेजपाल सिंह की हत्या और मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोट्टा की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार को नागरिकों की सुरक्षा और नशे की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर जवाब देना चाहिए। पार्टी इन घटनाओं को चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठा सकती है।
BJP-अकाली गठबंधन पर भी नजर
कांग्रेस की रणनीति में आम आदमी पार्टी के अलावा भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठबंधन का मुद्दा भी शामिल हो सकता है। राज्य में बीजेपी की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच दोनों दलों के दोबारा साथ आने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, फिलहाल गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
हिना कावरे के मुताबिक, कांग्रेस ने भी ऐसी चर्चाएं सुनी हैं, लेकिन अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका मानना है कि यदि बीजेपी और अकाली दल साथ आते हैं, तो इसका राजनीतिक असर कांग्रेस के पक्ष में भी जा सकता है।
इसके साथ ही कांग्रेस 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाली INDIA गठबंधन की रैली में पंजाब से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी कर रही है। कुल मिलाकर, पंजाब में कांग्रेस का फोकस संगठनात्मक एकजुटता, नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था, किसानों और युवाओं के मुद्दों पर रहेगा। राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को पार्टी के चुनावी अभियान के लिए अहम माना जा रहा है।

