कानपुर : ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी बिठूर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित दौरे को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चर्चा है कि मुख्यमंत्री 26 अक्टूबर को बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक उनके दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संभावित कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
शुक्रवार को मंडलायुक्त के. विजयेन्द्र पांडियन, पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल और जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने महर्षि वाल्मीकि आश्रम पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने संभावित कार्यक्रम स्थल, सुरक्षा व्यवस्था और आवागमन के रास्तों का जायजा लिया। संबंधित विभागों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए गए, ताकि कार्यक्रम की स्थिति स्पष्ट होने पर व्यवस्थाएं समय से पूरी की जा सकें।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर प्रशासन का जोर
मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को लेकर शुक्रवार को प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर चलता रहा। सुरक्षा इंतजामों, पुलिस बल की तैनाती, रास्तों में संभावित बदलाव और विभागीय जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई। सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
बिठूर में मुख्यमंत्री के आने की चर्चा के बीच स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है वाल्मीकि आश्रम
बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम का हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि ने इसी स्थान पर रामायण की रचना की थी। यह भी मान्यता है कि भगवान राम द्वारा सीता का परित्याग किए जाने के बाद माता सीता ने इसी आश्रम में शरण ली थी।
धार्मिक कथाओं के अनुसार, लव और कुश का जन्म इसी आश्रम में हुआ और उन्होंने यहां शिक्षा प्राप्त की। मान्यता है कि भगवान राम के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा भी लव-कुश ने यहीं रोका था। आश्रम एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और यहां तक पहुंचने वाली सीढ़ियों को स्थानीय स्तर पर ‘स्वर्ग की सीढ़ी’ कहा जाता है।
इतिहास से भी जुड़ा है बिठूर
बिठूर का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी खास है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी कई स्मृतियां इस क्षेत्र की पहचान का हिस्सा हैं। तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों के कारण भी यह क्षेत्र चर्चित रहा है।
मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को देखते हुए प्रशासन सभी जरूरी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है। अब सबकी नजरें 26 अक्टूबर के संभावित कार्यक्रम और मुख्यमंत्री के दौरे की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।

