लखनऊ में ‘इमैजिनेरियम 2026’ का आगाज, 48 देशों की फिल्मों से सिनेमा का अनूठा संगम

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लखनऊ : नवाचार, रचनात्मकता और कहानी कहने के नए अंदाज के साथ लखनऊ फिल्म फेस्टिवल सीजन ‘इमैजिनेरियम 2026’ का शुक्रवार को गोमती नगर स्थित एसआरएस सिनेमा में भव्य शुभारंभ हुआ। 23 और 24 अक्टूबर को आयोजित हो रहा यह दो दिवसीय महोत्सव फिल्म प्रदर्शन के साथ युवा प्रतिभाओं को मंच देने और सिनेमा की नई तकनीकों से रूबरू कराने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। इस बार महोत्सव में 48 देशों से फिल्में पहुंची हैं, जो भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा की विविधता को सामने लाएंगी।

दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी में हुआ उद्घाटन

उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी और प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। फिल्मकार एवं निर्णायक मंडल की सदस्य ज्योति कपूर दास, वंदना सहगल और लेखिका सुनीता एरन समेत कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।

समारोह में सिनेमा की बदलती दुनिया, नई प्रतिभाओं की संभावनाओं और रचनात्मक तकनीकों की भूमिका पर चर्चा हुई। फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य स्थापित फिल्मकारों और उभरते कलाकारों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे अपनी कहानियां साझा करने के साथ एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें।

सात साल से जारी है फिल्म फेस्टिवल का सफर

लखनऊ फिल्म फोरम की अध्यक्ष रेणुका टंडन ने कहा कि फिल्म फेस्टिवल के माध्यम से ऐसा मंच तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जहां अनुभवी फिल्मकारों और नई प्रतिभाओं के बीच संवाद स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि सिनेमा, एनीमेशन और उभरती तकनीकों के सहारे लखनऊ को एक सशक्त रचनात्मक केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाएं हैं।

रेणुका टंडन के मुताबिक, पिछले सात वर्षों से लगातार इस फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। हर साल महोत्सव को एक विशेष थीम के इर्द-गिर्द तैयार किया जाता है। पिछले वर्ष की थीम ‘सो हार्ड’ और ‘भाईचारा’ थी, जबकि इस बार का आयोजन अराजकता और खामोशी के बीच जन्म लेने वाली कहानियों पर केंद्रित है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष 48 देशों से फिल्में प्राप्त हुई हैं। बड़ी संख्या में फिल्म निर्माताओं ने अपनी कृतियां भेजी हैं, जिनमें अलग-अलग संस्कृतियों, अनुभवों और सामाजिक परिस्थितियों की झलक देखने को मिलेगी।

युवाओं के लिए सीखने और करियर बनाने का मौका

फेस्टिवल में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए भी कई अवसर हैं। एनीमेशन, एडिटिंग, फिल्ममेकिंग और स्क्रिप्ट राइटिंग जैसे विषयों पर आयोजित सत्रों के जरिए प्रतिभागियों को फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझने का मौका मिल रहा है।

रेणुका टंडन ने कहा कि जो युवा अभिनय, निर्देशन या फिल्म जगत के किसी अन्य क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह महोत्सव उपयोगी साबित हो सकता है। फिल्मकारों और जूरी सदस्यों के अनुभवों से युवाओं को रचनात्मक प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। निर्णायक मंडल चयनित फिल्मों का मूल्यांकन करेगा और विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

एआई, एनीमेशन और गेमिंग पर विशेष सत्र

‘इमैजिनेरियम 2026’ में चयनित भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ नई तकनीकों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कार्यक्रम में एआई-सहायित फिल्म निर्माण, एनीमेशन, गेमिंग और अन्य रचनात्मक तकनीकों पर आधारित सत्र, मास्टरक्लास और पैनल चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं।

महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में ‘ऑफ द जंगल’ के निर्माण पर आधारित मास्टरक्लास और पोलैंड की एनीमेशन फिल्मों का विशेष संकलन शामिल है। इन कार्यक्रमों के जरिए प्रतिभागियों को फिल्म निर्माण की प्रक्रिया, तकनीकी प्रयोगों और अंतरराष्ट्रीय एनीमेशन की दुनिया को समझने का अवसर मिल रहा है।

युवाओं को पसंद आ रहीं फिल्मों की कहानियां

फेस्टिवल में शामिल होने पहुंचीं आयुषी शर्मा ने कहा कि यहां युवाओं के लिए सीखने और नई कहानियों से जुड़ने के कई अवसर हैं। उन्होंने बताया कि अब तक वह ‘वन ऑफ 3’ और ‘जोगी मांगता है’ फिल्में देख चुकी हैं। उनके मुताबिक, दोनों फिल्मों का कहानी कहने का अंदाज शानदार रहा।

आयुषी ने कहा कि महोत्सव में शामिल फिल्में समाज की उन कहानियों को भी सामने लाती हैं, जो अक्सर लोगों की नजरों से दूर रह जाती हैं। ऐसी फिल्मों के माध्यम से दर्शकों को अलग-अलग अनुभवों और सामाजिक परिस्थितियों को समझने का मौका मिलता है।

वहीं, नितिन कुमार राय ने बताया कि फिल्म निर्माण की तकनीक को समझने की जिज्ञासा उन्हें महोत्सव तक खींच लाई। उन्होंने कहा कि दर्शक पर्दे पर कहानी देखते हैं, लेकिन उसके पीछे होने वाली मेहनत, तकनीकी प्रक्रिया और बड़ी टीम के योगदान को समझना भी जरूरी है। वह जानना चाहते हैं कि शॉर्ट फिल्म और फीचर फिल्म कैसे तैयार होती हैं तथा किसी कहानी को पर्दे पर उतारने के लिए किन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

कुल मिलाकर, ‘इमैजिनेरियम 2026’ लखनऊ में सिनेमा, तकनीक और रचनात्मकता को एक मंच पर लाने की पहल है। दो दिवसीय यह महोत्सव न केवल दर्शकों को विविध फिल्मों से जोड़ रहा है, बल्कि युवा फिल्मकारों को सीखने, संवाद करने और अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने का अवसर भी दे रहा है।

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