“इस्लाम नए ज़माने के हिसाब से नहीं, कुरआन और सुन्नत के मुताबिक चलेगा” : उलेमा 

Deoband News

सहारनपुर : मुस्लिम महिलाओं में पर्दे को लेकर बदलती सोच पर देवबंदी उलेमा और जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक मौलाना कारी इसहाक गोरा ने चिंता जताई है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि आज कुछ मुस्लिम महिलाओं को यह कहते हुए सुनना कि “पर्दा पुराने जमाने की बात है, अब समय बदल गया है” बेहद अफसोसनाक है। मौलाना गोरा ने कहा कि पर्दा इस्लाम की महत्वपूर्ण शिक्षाओं में शामिल है और इसे केवल बदलते समय या आधुनिक जीवनशैली के संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपनी धार्मिक शिक्षाओं और परंपराओं को समझने की अपील की।

मौलाना कारी इसहाक गोरा ने अपने संदेश में सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मुस्लिम समाज में दीनी तालीम की कमी हो रही है? उन्होंने कहा कि अगर समय के साथ लोगों की पसंद और जीवनशैली बदल रही है, तो इसका मतलब यह नहीं कि धार्मिक शिक्षाएं भी बदल जाएंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके अनुसार इस्लाम बदलते जमाने की पसंद के मुताबिक नहीं, बल्कि कुरआन और सुन्नत की रोशनी में चलेगा। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि नई पीढ़ी को धर्म की मूल शिक्षाओं से जोड़ने के लिए घरों में बेहतर तालीमी और दीनी माहौल तैयार किया जाए।

मौलाना गोरा ने बच्चों की परवरिश और उनके चरित्र निर्माण में परिवार की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और तरबियत की जिम्मेदारी केवल स्कूल और कॉलेज तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक, घर का वातावरण बच्चों की सोच और व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालता है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे घर में कुरआन, हदीस और दीनी शिक्षा के लिए नियमित माहौल बनाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के बारे में भी जानकारी दी जानी चाहिए।

मौलाना कारी इसहाक गोरा ने आधुनिक दौर की सुविधाओं और तकनीक को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा, तकनीक और सुविधाओं का इस्तेमाल अपनी जगह जरूरी है, लेकिन केवल इस आधार पर धार्मिक मान्यताओं में बदलाव करना कि “जमाना बदल गया है”, उनके अनुसार उचित नहीं है। उन्होंने मुस्लिम परिवारों से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान दिलाने के साथ-साथ धार्मिक मूल्यों से भी जोड़ें।

अपने संदेश के अंत में मौलाना गोरा ने कहा कि परिवारों को ऐसा तालीमी और दीनी माहौल तैयार करना चाहिए, जहां बेटियां और बेटे आधुनिक शिक्षा हासिल करने के साथ-साथ अपने धर्म, तहजीब और पहचान से भी परिचित हों। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके संदेश का मुख्य जोर मुस्लिम परिवारों में धार्मिक शिक्षा, पारिवारिक संस्कार और नई पीढ़ी को इस्लामी शिक्षाओं से जोड़ने पर रहा। मौलाना गोरा का कहना है कि आधुनिकता और तकनीक को अपनाते हुए भी धार्मिक मूल्यों और मान्यताओं के प्रति जागरूक रहना जरूरी है।

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