13 साल बाद शहीद सिपाही राहुल ढाका को मिला इंसाफ, मुकीम काला गैंग के दो सदस्यों को उम्रकैद

13 साल बाद शहीद सिपाही राहुल ढाका को मिला इंसाफ

सहारनपुर : करीब 13 साल पहले ड्यूटी के दौरान बदमाशों की गोलियों का सामना करते हुए शहीद हुए पुलिसकर्मी राहुल ढाका के परिवार को आखिरकार न्याय मिल गया। सहारनपुर की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-10 की अदालत ने मुकीम काला गैंग के सक्रिय सदस्य महताब उर्फ काना उर्फ जीवा और सादर खां को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की आधी राशि शहीद सिपाही के परिवार को देने का आदेश दिया गया है।

यह मामला 5 मई 2013 का है। उस समय सहारनपुर में तत्कालीन सीओ सदर बाजार उमेश कुमार यादव को वायरलेस पर सूचना मिली कि चिलकाना क्षेत्र में हरियाणा सीमा की ओर से आए बदमाशों ने एक पेट्रोल पंप पर लूट की वारदात को अंजाम दिया है। वारदात के बाद बदमाश सफेद रंग की कार से फरार हो रहे थे। सूचना मिलते ही सीओ पुलिस टीम के साथ बदमाशों की तलाश में निकल पड़े। उनके साथ गनर कांस्टेबल राहुल ढाका, गनर रामकुमार और चालक ऋषिपाल भी थे। पुलिस टीम ने कुतुबशेर थाना क्षेत्र की नाला पट्टी चौकी के पास संदिग्ध कार को देख लिया।

पुलिस ने कार का पीछा शुरू कर दिया। बदमाशों की कार गलीरा रोड पुलिया की तरफ मुड़ी, लेकिन इसी दौरान सामने ट्रैक्टर-ट्रॉली आने के कारण उनकी गाड़ी रुक गई। जैसे ही कार रुकी, पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की। इसी दौरान गनर राहुल ढाका बहादुरी दिखाते हुए वाहन से नीचे उतरे और बदमाशों को पकड़ने के लिए आगे बढ़े।

तभी बदमाशों ने राहुल पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलियां लगने से राहुल गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद बदमाशों ने उनकी कारबाइन, एक मैगजीन और 22 कारतूस भी लूट लिए और भीड़ का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।घटनास्थल पर आम नागरिकों की मौजूदगी अधिक होने के कारण पुलिस जवाबी फायरिंग नहीं कर सकी। घायल राहुल को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक बहादुर पुलिसकर्मी ड्यूटी निभाते हुए शहीद हो चुका था।

राहुल ढाका की शहादत के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान कुख्यात मुकीम काला गैंग की भूमिका सामने आई। करीब एक वर्ष बाद मुकीम काला को गिरफ्तार किया गया था। बाद में चित्रकूट जेल में उसकी मौत हो गई। जांच आगे बढ़ने के साथ गैंग के अन्य सदस्यों की भूमिका भी सामने आई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई 27 नवंबर 2013 से अदालत में चल रही थी।

करीब 13 वर्षों तक चली इस कानूनी लड़ाई में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 17 गवाह पेश किए। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य भी अदालत में रखे गए। सभी गवाहों की गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने महताब उर्फ काना उर्फ जीवा और सादर खां को दोषी करार दिया। दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और 75-75 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।दोनों आरोपी वर्तमान में राजस्थान की जयपुर और अजमेर जेल में बंद हैं। उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने पेश किया गया।

अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की आधी राशि शहीद सिपाही राहुल ढाका के परिवार को दी जाएगी। 13 साल बाद आए इस फैसले को पुलिस विभाग के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। राहुल ढाका ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए अपनी जान की परवाह नहीं की और अपराधियों का सामना करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। अदालत का यह फैसला केवल दो दोषियों को सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन पुलिसकर्मियों के लिए भी एक संदेश है जो हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हैं।

राहुल ढाका आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी बहादुरी और शहादत को अब अदालत के फैसले के जरिए न्याय की मुहर मिल गई है। 13 साल लंबी लड़ाई के बाद उनके परिवार को इंसाफ मिला और उनकी कुर्बानी एक बार फिर याद की गई।

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