सहारनपुर : शुक्रवार की शाम सहारनपुर के गंगोह थाना क्षेत्र के नया गांव (बसी कुंडा) में अचानक हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। जिस पटाखा फैक्ट्री में मजदूर रोज की तरह अपने काम में जुटे थे, कुछ ही सेकंड में वही जगह मौत और तबाही के मंजर में बदल गई। शाम करीब पांच बजे हुए जोरदार धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। विस्फोट इतना भयानक था कि फैक्ट्री का एक हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

धमाके के बाद चारों तरफ धुएं का गुबार छा गया। फैक्ट्री की दीवारें भरभराकर गिर गईं और छत भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विस्फोट में मजदूरों के शरीर के अंग दूर-दूर तक जा गिरे। घटनास्थल का मंजर देखकर ग्रामीणों की रूह कांप उठी।
धमाके की आवाज सुनते ही आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े। किसी ने आग बुझाने की कोशिश की तो कोई मलबे में दबे लोगों को तलाशने लगा। कुछ ही देर में पुलिस, दमकल, प्रशासन और एंबुलेंस की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।

लेकिन इस हादसे ने दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। हादसे में मध्य प्रदेश के रहने वाले दीपराज देवड़ा, उम्र 20 वर्ष, और संदीप देवड़ा, उम्र 22 वर्ष, की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दीपराज ठेकेदार के रूप में काम करता था और बेहतर रोजगार की तलाश में अपने साथियों के साथ सहारनपुर आया था। परिवार को उम्मीद थी कि वह मेहनत कर अपने भविष्य को बेहतर बनाएगा, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि जिस काम के लिए वह घर से निकला था, वही उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
राहत दल को एक शव फैक्ट्री के मलबे में दबा मिला, जबकि दूसरा शव करीब 100 मीटर दूर खेत के पास मिला। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया। घटनास्थल पर बिखरा मलबा और खून का मंजर हर किसी को झकझोर देने वाला था।
इस बीच हादसे के बाद आकाश रावत और लालू पिपराद नाम के दो मजदूरों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई। प्रशासन को आशंका है कि दोनों मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। जेसीबी मशीनों और राहत टीमों की मदद से देर रात तक मलबा हटाकर उनकी तलाश जारी रही। हर किसी की निगाहें राहत दल पर टिकी थीं और लोग उम्मीद कर रहे थे कि शायद दोनों मजदूर सुरक्षित मिल जाएं।

बताया जा रहा है कि करीब 10 बीघा क्षेत्र में फैली इस फैक्ट्री में बड़ी संख्या में मजदूर पटाखे बनाने का काम करते थे। हादसे के समय फैक्ट्री परिसर में करीब 23 मजदूर मौजूद थे, लेकिन विस्फोट वाले हिस्से में केवल चार लोग काम कर रहे थे। धमाका होते ही बाकी मजदूर किसी तरह वहां से बाहर निकलने में कामयाब रहे।
हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। जिलाधिकारी अरविंद चौहान के मुताबिक फैक्ट्री का लाइसेंस वर्ष 2028 तक वैध है, लेकिन प्रशासन इस बात की भी जांच करेगा कि क्या वहां सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था। एसडीएम को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने बताया कि फैक्ट्री को सील कर दिया गया है। फोरेंसिक टीम और विस्फोटक विशेषज्ञ घटनास्थल से नमूने जुटा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही विस्फोट के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
फिलहाल यह हादसा सिर्फ दो मजदूरों की मौत की खबर नहीं है, बल्कि उन परिवारों के टूटे सपनों की कहानी है, जिन्होंने अपने बेटों को बेहतर भविष्य की उम्मीद में सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजा था। वे घर से निकले थे अपने परिवार की जिंदगी संवारने, लेकिन अब उनके घर लौटेंगी सिर्फ उनकी यादें। फैक्ट्री के बाहर पसरा सन्नाटा, मलबे के बीच जारी तलाश और अपनों की राह ताकती आंखें इस हादसे की भयावहता को बयां कर रही हैं।

