सहारनपुर : कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद सहारनपुर में माहौल बिगाड़ने की कोशिश का मामला सामने आया है। मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी के बीच शहर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर वाले पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों में वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़ी तस्वीरों के साथ अखिलेश यादव की तस्वीर भी लगाई गई थी। पोस्टर सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी पोस्टर हटवा दिए।

बताया जा रहा है कि पोस्टरों पर “न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे…” जैसे संदेश लिखे गए थे। दंगों की बरसी के दिन ऐसे पोस्टर लगाए जाने से इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पोस्टरों को राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, इन्हें किस व्यक्ति या संगठन ने लगाया, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
पुलिस ने पोस्टर हटाने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पोस्टर कहां से आए और इन्हें किसने लगाया था। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। हालात को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
गौरतलब है कि 7 सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर और आसपास के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा की शुरुआत हुई थी। इस हिंसा का असर कई इलाकों में देखने को मिला था और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। घटना के बाद पश्चिमी यूपी की राजनीति में इसका मुद्दा लंबे समय तक चर्चा में रहा।
सहारनपुर में यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर पहले से राजनीतिक बयानबाजी तेज है। मस्जिद कार्रवाई के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ऐसे में दंगों से जुड़ी तस्वीरों वाले पोस्टरों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल पुलिस पोस्टर लगाने वालों की पहचान करने में जुटी है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी स्थिति में शहर का माहौल खराब करने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

