सहारनपुर में सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर सौंपा ज्ञापन, बोले- ‘अघोषित आपातकाल जैसे हालात’

SP Delegation in Saharanpur

सहारनपुर : कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद सहारनपुर में सियासी हलचल और तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर सोमवार को पार्टी का प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त को ज्ञापन देने पहुंचने वाला था। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले ही पुलिस ने कई सपा नेताओं को उनके घरों पर नजरबंद कर दिया। इस बीच मुजफ्फरनगर से सपा सांसद हरेंद्र मलिक और जिलाध्यक्ष जिया चौधरी पुलिस को चकमा देकर सहारनपुर पहुंच गए।

SP Delegation in Saharanpur

हरेंद्र मलिक और जिया चौधरी ने कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर मंडलायुक्त रुपेश कुमार से मुलाकात का प्रयास किया। बताया गया कि प्रतिनिधिमंडल ने पहले से मिलने का समय लिया था, लेकिन कमिश्नर के कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण दोनों को करीब एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा। बाद में उन्होंने डिप्टी कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा और वापस लौट गए।

कमिश्नर कार्यालय से बाहर निकलने के बाद हरेंद्र मलिक ने पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके साथियों को घरों में रोक दिया गया है और मौजूदा हालात ‘अघोषित आपातकाल’ जैसे हैं। सांसद ने कहा, “मैं बचते-बचाते यहां पर पहुंचा हूं।”

सपा सांसद ने कलेक्ट्रेट मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ मस्जिद को गिराया जा रहा है और दूसरी तरफ मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े पोस्टर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि ऐसी स्थिति को अघोषित आपातकाल नहीं कहा जाएगा तो फिर इसे क्या कहा जाएगा।

दरअसल, कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन ने न्यायिक प्रक्रिया के बाद हटाने की कार्रवाई की है। इसके बाद से विपक्षी दल लगातार सरकार और जिला प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने मामले की जानकारी लेने और प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखने के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया था।

सपा का आरोप है कि प्रतिनिधिमंडल के कई नेताओं को पुलिस ने उनके घरों पर ही नजरबंद कर दिया, जिसके चलते वे सहारनपुर नहीं पहुंच सके। हरेंद्र मलिक के सहारनपुर पहुंचने के बाद उन्होंने पार्टी की ओर से ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी और संबंधित तथ्यों को सामने रखने की मांग की।

मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद अब मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। विपक्षी दल जहां इसे लेकर सरकार को घेर रहे हैं, वहीं पुलिस-प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सियासी और कानूनी दोनों स्तरों पर और गरमा सकता है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया News 14 Today के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...

Related posts