सहारनपुर : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को हटाए जाने के बाद मामला अब राजनीतिक और कानूनी रूप से गरमा गया है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सरकार और जिला प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई राजनीतिक लाभ-हानि की नहीं, बल्कि दस्तावेजों और कानूनी आधार की है। उन्होंने साफ किया कि जरूरत पड़ी तो वह इस मामले को हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे।

कलेक्ट्रेट परिसर में बनी यह मस्जिद करीब 3300 स्क्वायर फीट क्षेत्र में थी। दो मंजिला इमारत में दो बड़े हॉल और पांच कमरे बताए गए हैं। ग्राउंड फ्लोर पर एक बड़ा हॉल और दो कमरे थे, जबकि पहली मंजिल पर हॉल के साथ एक बड़ा कमरा था। इसी परिसर के एक कमरे में डाकघर भी संचालित होता था। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि मस्जिद परिसर के कुछ कमरे बाहरी लोगों को किराए पर दिए गए थे और उनसे किराया वसूला जाता था।
मस्जिद को अवैध बताए जाने को लेकर विवाद की शुरुआत 10 फरवरी 2025 को हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी। शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए। प्रशासनिक जांच के बाद निर्माण को अवैध बताए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद 24 मार्च 2025 को प्रशासन ने नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दाखिल की। करीब डेढ़ साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 16 जुलाई 2026 को कोर्ट ने मस्जिद को अवैध मानते हुए उसे हटाने और करीब 6.41 करोड़ रुपये का हर्जाना वसूलने का आदेश दिया। कब्जेदारों को 30 दिन का समय दिया गया था।

मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष ने 20 जुलाई को जिला कोर्ट का रुख किया। 24 जुलाई को जिला कोर्ट ने आदेश पर स्टे देते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई। इसके बाद 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
कार्रवाई के बाद सांसद इमरान मसूद ने एमएलसी शाहनवाज खान के घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, “आज हमारे लिए ये काला दिन है। आपने हमारी मस्जिद को गिराकर ठीक नहीं किया।” उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद पर बुलडोजर चलाकर संविधान के विरुद्ध काम किया गया।
इमरान मसूद ने जमीन के स्वामित्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस जमीन को सरकारी बता रही है तो पहले उसे दस्तावेजों के जरिए यह साबित करना चाहिए। उनका कहना है कि खाली जमीन पर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन मस्जिद वाली जमीन के स्वामित्व को स्पष्ट किए बिना कार्रवाई उचित नहीं है।
सांसद ने कहा कि यह उनके लिए राजनीति या व्यक्तिगत लाभ का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अमन और भाईचारे में विश्वास रखते हैं। “ये लड़ाई कलम की है और हम कलम से ही लड़ेंगे,” कहते हुए उन्होंने कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही।
अब मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर उच्च अदालतों की संभावित सुनवाई तक पहुंचने वाला है। प्रशासन की कार्रवाई और अदालत के आदेश के बीच मस्जिद पक्ष की कानूनी चुनौती इस विवाद की अगली दिशा तय करेगी।

