सहारनपुर : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों से रात में बातचीत के दौरान कार्रवाई नहीं किए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन इसके बावजूद शनिवार सुबह अंधेरे में मस्जिद को ढहा दिया गया।
चंद्रशेखर आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने मामले को लेकर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से रात में लंबी बातचीत की थी। इस दौरान उन्हें तत्काल कार्रवाई नहीं होने का भरोसा दिया गया था। सांसद का आरोप है कि सुबह अचानक प्रशासन ने ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया। उन्होंने इसे प्रशासन का तानाशाहीपूर्ण रवैया बताते हुए कहा कि ऐसी कार्यप्रणाली से सरकारी व्यवस्था के प्रति लोगों के भरोसे पर असर पड़ता है।
उन्होंने सबसे बड़ा सवाल न्यायिक आदेश की व्याख्या को लेकर उठाया। चंद्रशेखर के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश में अतिक्रमण या कब्जा हटाने की बात थी, लेकिन प्रशासन ने पूरी इमारत को ही ध्वस्त कर दिया। उन्होंने पूछा कि यदि आदेश केवल अतिक्रमण हटाने का था तो पूरी मस्जिद गिराने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। उनका कहना है कि न्यायिक आदेश की सीमा और प्रशासन की कार्रवाई के बीच अंतर की जांच होनी चाहिए।
सांसद ने मस्जिद के पुराने इतिहास का हवाला देते हुए दावा किया कि यह धार्मिक स्थल आजादी से पहले से मौजूद है और ब्रिटिश काल का है। उन्होंने इसे वर्ष 1911 से भी पुराना बताया। साथ ही Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 का जिक्र करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कानून के प्रावधानों और संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। हालांकि इस कानून की मौजूदा मामले में लागू होने की वास्तविक स्थिति का अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में प्रशासन को निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जल्दबाजी में की गई कार्रवाई से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि हर समुदाय के साथ समान व्यवहार हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आजाद समाज पार्टी इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगी। यदि कार्रवाई में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। पार्टी जरूरत पड़ने पर न्यायालय और अन्य संवैधानिक मंचों पर मामला उठाएगी।
फिलहाल सहारनपुर मस्जिद विवाद प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बन चुका है। एक ओर प्रशासन न्यायिक आदेश के आधार पर कार्रवाई की बात कह रहा है, वहीं चंद्रशेखर आजाद आदेश और ध्वस्तीकरण के तरीके के बीच अंतर का सवाल उठा रहे हैं।

