सहारनपुर : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाए जाने के बाद मामला अब राजनीतिक और कानूनी विवाद में बदल गया है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे तानाशाहीपूर्ण रवैया बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों से रात में बातचीत के दौरान उन्हें तत्काल कार्रवाई नहीं किए जाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद शनिवार सुबह अंधेरे में मस्जिद को ढहा दिया गया।
चंद्रशेखर आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने मस्जिद विवाद को लेकर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से रात में लंबी बातचीत की थी। उनका दावा है कि बातचीत के दौरान प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद सुबह अचानक ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया गया। सांसद ने कहा कि इस तरह की कार्यप्रणाली से लोगों के बीच प्रशासन और सरकारी व्यवस्था को लेकर भरोसे का संकट पैदा हो सकता है।
उन्होंने कार्रवाई के आधार पर भी सवाल उठाए। चंद्रशेखर आजाद के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश में अतिक्रमण या कब्जा हटाने की बात कही गई थी, जबकि प्रशासन ने मौके पर पूरी इमारत को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने सवाल किया कि यदि आदेश केवल अतिक्रमण हटाने से संबंधित था तो पूरी मस्जिद को गिराने का फैसला किस आधार पर लिया गया। उन्होंने कहा कि न्यायिक आदेश की शब्दावली और प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की जांच होनी चाहिए।
सांसद ने मस्जिद के इतिहास का जिक्र करते हुए दावा किया कि यह धार्मिक स्थल आजादी से पहले से मौजूद है और ब्रिटिश काल का है। उन्होंने इसे वर्ष 1911 से भी पुराना बताया। उनका कहना है कि इतने पुराने धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में प्रशासन को बेहद संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करनी चाहिए।
चंद्रशेखर आजाद ने Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 का भी उल्लेख किया और कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कानून के प्रावधानों पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, इस कानून की इस मामले में वास्तविक कानूनी प्रयोज्यता और दायरे का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले में चुप नहीं बैठेगी। जरूरत पड़ने पर न्यायालय समेत सभी संवैधानिक मंचों पर लड़ाई लड़ी जाएगी। सांसद ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि हर समुदाय के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो। मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद अब सहारनपुर में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। प्रशासन न्यायिक आदेश और अतिक्रमण संबंधी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई की बात कर रहा है, जबकि चंद्रशेखर आजाद ने कार्रवाई के तरीके और आदेश की व्याख्या पर सवाल उठाए हैं।

