सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद के मलबे में मिला 20 फीट गहरा कुआं, इमरान मसूद बोले- इसे हिंदू-मुस्लिम मुद्दा न बनाएं

MP Imran Masood spoke after Eid prayers

सहारनपुर : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के अगले दिन मलबा हटाने के दौरान करीब 20 फीट गहरा कुआं मिलने से मामले में एक नया पहलू जुड़ गया है। रविवार को सफाई और मलबा हटाने के दौरान कुआं सामने आने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। अब कुएं की उम्र और उसके निर्माण से जुड़े तथ्य जुटाए जा रहे हैं।

मलबा हटाने के दौरान एक मजबूत स्लैब सामने आया था। मशीन से इसे हटाना संभव नहीं हुआ तो कटर की मदद से स्लैब को काटा गया। इसके नीचे कुआं दिखाई दिया। अधिकारियों के मुताबिक कुएं की गहराई करीब 20 फीट और चौड़ाई लगभग डेढ़ मीटर है। फिलहाल प्रशासन ने कुएं की वास्तविक स्थिति और उसके निर्माण काल को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

ASI Inspects Well in Saharanpur

कुएं के मिलने के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि इसका निर्माण मस्जिद से पहले हुआ था या बाद में। प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर पुरातत्व विभाग की टीम से भी इसकी जांच कराए जाने की संभावना है। विशेषज्ञ कुएं की संरचना और निर्माण शैली का अध्ययन कर यह पता लगा सकते हैं कि इसका कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है या नहीं।

इस बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कुआं मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए लोगों से मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पुराने समय में खेतों के भीतर बने ठिकानों या ‘रिठान’ पर मस्जिदें बनाई जाती थीं और वहां पानी की जरूरत के लिए कुएं भी बनाए जाते थे।

इमरान मसूद ने बताया कि पुराने दौर में बोरिंग की सुविधा नहीं थी। कुओं में रहट लगाकर पानी निकाला जाता था और उसी पानी का इस्तेमाल वजू समेत दूसरी जरूरतों के लिए किया जाता था। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट परिसर में मिला कुआं भी उस समय की व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है।

कुएं की पुरातात्विक जांच की मांग के बीच इमरान मसूद ने कहा कि सहारनपुर में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग रहते हैं, इसलिए इसे हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी संगठन से नहीं, बल्कि प्रशासन की कार्रवाई को लेकर है और मामले का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में ही होगा।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता स्थल को सुरक्षित रखने और मलबा हटाने की है। कुएं की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वह कितना पुराना है और उसका मस्जिद से क्या संबंध रहा है।

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